Modi की शपथ से पहले ये हैं 10 बड़े सस्पेंस! Team Modi में कौन-कौन?

संक्षेप:

  • पीएम मोदी के नए मंत्रिपरिषद के चेहरों को लेकर तरह-तरह की अटकलें लग रही हैं.
  • मसलन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह सरकार का हिस्सा बनेंगे या संगठन में ही रहेंगे.
  • अरुण जेटली की जगह कौन लेगा?

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 7 बजे अपने मंत्रियों के साथ पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे. इस बार उनकी टीम में कौन-कौन होगा, इसे लेकर 23 मई के बाद से ही सस्पेंस बना हुआ है. चुनाव नतीजों के बाद से ही पीएम मोदी और अमित शाह करीब-करीब हर दिन साथ बैठकर नई सरकार को लेकर मंथन किया है. ऐसे में मंत्रियों के नामों से लेकर उनके पोर्टफोलियो तक सबकुछ तय हो चुके हैं लेकिन इस कदर गोपनीयता बरती जा रही है कि इससे पर्दा शपथ के वक्त ही उठेगा. पीएम मोदी के नए मंत्रिपरिषद के चेहरों को लेकर तरह-तरह की अटकलें लग रही हैं मसलन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह सरकार का हिस्सा बनेंगे या संगठन में ही रहेंगे, अरुण जेटली की जगह कौन लेगा?

1. शाह सरकार में होंगे या संगठन देखेंगे?

सबसे बड़ा सस्पेंस बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की भूमिका को लेकर है. वैसे तो शाह ने जब गांधीनगर से दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी की जगह खुद चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया, तभी से ऐसी अटकलें लगने लगीं कि अगर मोदी सरकार फिर से आई तो इस बार शाह भी उसका हिस्सा बनेंगे. अब जब प्रचंड बहुमत के साथ मोदी 2.0 की शुरुआत होने जा रही है तो सबकी निगाह इस पर है कि शाह को कौन सा मंत्रालय दिया जाएगा. उन्हें गृह मंत्रालय से लेकर वित्त मंत्रालय तक दिए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं. वैसे ऐसी भी अटकलें लग रही हैं कि शाह सरकार में शामिल ही नहीं होंगे और संगठन का नेतृत्व करते रहेंगे. अगर शाह मंत्री बनते हैं तो बीजेपी के `एक व्यक्ति, एक पद` सिद्धांत के तहत उन्हें पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ेगा.

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2. जेटली की जगह कौन लेगा?

मोदी के पहले कार्यकाल में बेहद ताकतवर मंत्री रहे अरुण जेटली खराब सेहत की वजह से इस बार कैबिनेट का हिस्सा नहीं होंगे. उन्होंने खुद पीएम मोदी को खत लिखकर उन्हें मंत्री बनाए जाने पर विचार नहीं करने की गुजारिश की है. ऐसे में यह भी बड़ा सस्पेंस है कि जेटली की जगह कौन लेगा? मोदी 2.0 में वित्त मंत्री कौन होगा? इससे पहले जब जेटली इलाज के लिए अमेरिका गए थे और बाद में एक बार जब घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे तब उनकी अनुपस्थिति में पीयूष गोयल ने वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली थी. इस लिहाज से देखें तो वित्त मंत्रालय पर गोयल की दावेदारी मजबूत है. हालांकि, इसके लिए शाह का भी नाम चर्चाओं में है लिहाजा अगले वित्त मंत्री को लेकर जबरदस्त सस्पेंस बना हुआ है.

3. स्मृति इरानी को कौन सा मंत्रालय?

मोदी 2.0 में शुरुआत में मंत्रिपरिषद का आकार छोटा होगा. पिछली बार जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तो उनके साथ कुल 46 मंत्रियों ने शपथ ली थी लेकिन पहले कार्यकाल के आखिर में (फरवरी 2019) यह संख्या 70 थी. इस लिहाज से इस बार भी कम संख्या में मंत्री होंगे और बाद में मंत्रिपरिषद का विस्तार हो सकता है. गांधी परिवार के गढ़ अमेठी में राहुल गांधी को शिकस्त देने वाली स्मृति इरानी को कोई अहम मंत्रालय मिलना तय है.

4. सुषमा की जगह कौन लेगा?

पिछली सरकार में रहे ज्यादातर सीनियर मंत्री इस बार भी मंत्रिपरिषद का हिस्सा हो सकते हैं. हालांकि, दिलचस्प बात यह होगी कि इस बार किसे कौन सा मंत्रालय दिया जाएगा. विदेश मंत्री कौन होगा, इसे भी उत्सुकता की नजर से देखा जा रहा है. चूंकि, स्वास्थ्य कारणों से सुषमा स्वराज ने इस बार लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा था। ऐसे में इस पर निगाह होगी कि सुषमा सरकार में शामिल रहेंगी या नहीं.

5. जेडीयू को 2 मंत्री पद?

निगाह इस पर भी रहेगी कि बीजेपी के अलावा एनडीए के बाकी घटक दलों को कौन-कौन से मंत्रालय मिलेंगे. इस बार जेडीयू भी सरकार का हिस्सा बनेगी. ऐसी अटकलें हैं कि उसे मंत्रिपरिषद में 2 सीटें मिल सकती है. जेडीयू से राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह और मुंगेर से लोकसभा सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह मंत्री बनाए जा सकते हैं.

6. शिवसेना से इस बार कौन?

शिवसेना की तरफ से अरविंद सावंत मंत्रिपरिषद में जगह पा सकते हैं, जो अनंत गीते की जगह लेंगे. गीते पिछली बार शिवसेना से एकमात्र मंत्री थे. सावंत ने कांग्रेस के मिलिंद देवड़ा को एक लाख से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी. इसी तरह अपना दल की तरफ से अनुप्रिया पटेल का भी फिर से मंत्री बनना तय है.

7. सुखबीर लेंगे पत्नी की जगह

अकाली दल की तरफ से इस बार बहुत मुमकिन है कि सुखबीर सिंह बादल मंत्री बनाए जाएंगे. पिछली सरकार में उनकी पत्नी हरसिमरत कौर कैबिनेट में थीं.

8. रामविलास पासवान या चिराग पासवान?

इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने वाले एलजेपी चीफ राम विलास पासवान को लेकर भी सस्पेंस है. वैसे तो उन्होंने अपने सांसद बेटे चिराग पासवान को मंत्री बनाए जाने के संकेत दिए थे. लेकिन एलजेपी बैठक में उनको ही मंत्री बनाए जाने और चिराग को पार्टी के संसदीय दल के नेता बनाए जाने संबंधी प्रस्ताव पास किया गया था.

9. बंगाल से बढ़ेंगे मंत्री?

पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में बीजेपी का प्रदर्शन बहुत शानदार रहा, लिहाजा मंत्रिपरिषद में इन राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है. खासकर पश्चिम बंगाल, जहां 2 साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां से ज्यादा मंत्री बनाए जा सकते हैं. बीजेपी ने इस बार बंगाल में 18 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि 2014 में उसे 2 सीटें मिली थीं. इसके अलावा महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड का भी मंत्रिपरिषद में प्रतिनिधित्व बढ़ने की उम्मीद है. इन राज्यों में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

10. मनोज सिन्हा का क्या होगा?

इस बार गाजीपुर से हार का सामना करने वाले मनोज सिन्हा क्या मोदी मंत्रिपरिषद में जगह बना पाएंगे? ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि सिन्हा को इस बार भी मंत्री बनाया जाएगा और उन्हें राज्यसभा के जरिए संसद भेजा जाएगा.
संतोष गंगवार प्रोटेम स्पीकर होंगे जो नए सांसदों को शपथ दिलाएंगे, वह बरेली से 8वीं बार लोकसभा में पहुंचे हैं.

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