बिहार: पिछले चार दिनों की बारिश ने तोड़ा 1987 का रिकॉर्ड, कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के पार

संक्षेप:

  • बिहार में बाढ़ का क़हर लगातार जारी है. पिछले चार दिनों की बारिश ने साल 1987 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है
  • रविवार को सीएम नीतीश कुमार के हवाई सर्वेक्षण के बाद भी लगातार उन इलाक़ों में निगरानी रखी जा रही है
  • अब तक की बारिश ने ही साल 1987 की 54.34 mm के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है और ये आंकड़ा 54.50mm तक पहुंच गया है. 

बिहार में बाढ़ का क़हर लगातार जारी है. पिछले चार दिनों की बारिश ने साल 1987 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. रविवार को सीएम नीतीश कुमार के हवाई सर्वेक्षण के बाद भी लगातार उन इलाक़ों में निगरानी रखी जा रही है. अब तक की बारिश ने ही साल 1987 की 54.34 mm के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है और ये आंकड़ा 54.50mm तक पहुंच गया है. उधर कोसी, महानंदा, परमान, कमला बलान, पश्चिम कनक़ई और मैंची जैसी नदियों के जलस्तर में हो रही है लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए अलर्ट रहने की चेतावनी दे दी गई है. हालांकि मौसम विभाग के मुताबिक़ सोमवार को कुछ राहत की ज़रूर उम्मीद है.बूढ़ी गंडक नदी में आए उफान से चनपटिया और आसपास के क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हैं. बाग़मती नदी से सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर और बेनीबाद के आसपास का इलाक़ा प्रभावित है. कमला बलान के कई जगहों पर बांध टूटने से सबसे ज़्यादा जयनगर और झंझारपुर के लोगों को दिक्कत हो रही है. जल संसाधन विभाग के मुताबिक़ कोसी के जलस्तर लगातार बढ़ने से सुपौल, बसुआ, बलतारा और करसैला के इलाके में लोग प्रभवित हैं. इसी तरह महानंदा और परमान नदी से देगराघाट, झावा, अररिया और आसपास के क्षेत्र लोग प्रभावित हैं.बिहार में मधुबनी, अररिया, मोतिहारी, रक्सौल, दरभंगा, सहरसा, समस्तीपुर, सुपौल, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित हैं. खास तौर पर बिहार के उत्तरी इलाकों में हाल बहुत खराब हैं. बाढ़ से राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआएफ और एसडीआरएफ की 25 टीमें तैनात की गई हैं.

नेपाल में भी हुई बारिश के कारण वहां से आने वाली नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं. लखनदेई नदी मुजफ्फरपुर के गायघाट, बागमती मुजफ्फरपुर के औराई, कमला बलान और अधवाड़ा नदी दरभंगा में खतरे के निशाना से ऊपर बह रही है. इसके अलावा बागमती नदी हायाघाट, बेनीबाद, डुबाधार, सोनाखान और ढेंग में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि कमला बलान जयनगर और झंझारपुर में, महानंदा ढंगराघाट और झावा में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.

ये भी पढ़े : अयोध्या: राम मंदिर निर्माण के लिए मुस्लिम समाज आया आगे, पत्थरों की सफाई कर दिया योगदान


Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Related Articles