नेपाल को बिहार की तरफ से सौगात, बिजली देने के लिए दो नई ट्रांसमिशन लाइन बिछाएगा बिहार

संक्षेप:

  • नेपाल को बिहार की तरफ से एक सौगात।
  • दो नए ट्रांसमिशन लाइन बिछाने की तैयारी।
  • नेपाल को अभी 441 मेगावाट तक बिजली की आपूर्ति की जाती है।

पटना। नेपाल को बिहार की तरफ से एक सौगात मिलने वाला है। नेपाल को बिजली उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ट्रांसमिशन लाइन बिछाएगी। बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड इसके लिए दो नए ट्रांसमिशन लाइन बिछाने की तैयारी कर रही है। उल्लेखनीय है कि बिहार की ओर से नेपाल को अभी 441 मेगावाट तक बिजली की आपूर्ति की जाती है। नेपाल को निर्बाध व गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने में ट्रांसमिशन लाइन की अहम भूमिका है। इसलिए बिहार सरकार दो नए ट्रांसमिशन लाइन बिछा रही है। 

पहली लाइन पर तीन करोड़ 19 लाख खर्च होंगे वहीं, दूसरी लाइन पर 24 करोड़ 55 लाख रुपए खर्च होंगे

जानकारी के अनुसार, पहली लाइन 132 केवीए की कटैया से कुसहा के बीच होगी। इस मद में तीन करोड़ 19 लाख खर्च होंगे। जबकि दूसरी लाइन 132 केवीए में रक्सौल-परवानीपुर ट्रांसमिशन लाइन होगी। इस मद में 24 करोड़ 55 लाख रुपए खर्च होंगे। 

ये भी पढ़े : अच्छी खबर: अब से नोएडा में ग्रामीण इलाके में होगी ऑक्सीजन भरने की सुविधा, पूरे जिले को पांच हिस्सों में बांटा गया 


नेपाल के अनुरोध पर ट्रांसमिशन कंपनी की ओर से इस परियोजना पर कार्रवाई की जाएगी

बिहार के ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का कहना है कि नेपाल के अनुरोध पर ट्रांसमिशन कंपनी की ओर से इस परियोजना पर कार्रवाई की जा रही है। ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने भी अपनी सहमति प्रदान कर दी है। इसके अलावा उन्होंने ट्रांसमिशन लाइन की उपलब्धियों पर ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि बीते वर्षों में विद्युत क्षेत्र में कंपनी ने काफी उपलब्धियां हासिल की हैं। ट्रांसमिशन की आधारभूत संरचनाओं का निर्माण हुआ है। इसी क्रम में नेपाल सरकार को बिजली देने के लिए ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का सीधा अर्थ है कि बिहार की ट्रांसमिशन कंपनी गुणवत्तापूर्ण काम कर रही है। 

 

 


 

If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Related Articles