तेज प्रताप का नहीं लगेगा जनता दरबार, आज से होनी थी शुरूआत

संक्षेप:

  • पटना में तेज प्रताप का नहीं लगेगा जनता दरबार
  • आज से आरजेडी दफ्तर में लगना था जनता दरबार
  • कुछ कारणों से  रद्द कर दिया गया कार्यक्रम 

पटना में बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व स्वास्थय मंत्री तेजप्रताप यादव 27 मई से आरजेडी दफ्तर में जनता दरबार लगाने वाले थे पर 2019 लोक सभा चुनाव परिणाम के बाद और कुछ कारणों के वजह से उन्होंने इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया है. 

खबर के मुताबिक इस जनता दरबार में तेजप्रताप आमलोग के साथ-साथ पार्टी के कार्यकर्ताओं की समस्या भी सुनने वाले थे. बताया जा रहा है कि तेजप्रताप लोकसभा चुनाव में हुए हार की समीक्षा भी करेंगे. कार्यकर्ताओं से जानेंगे कि चुनाव में कहां चूक हुई, जिससे आरजेडी की लोकसभा चुनावों में इतनी बड़ी हार हुई है. बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में तेजप्रताप और तेजस्वी यादव के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद हुआ था.

ये भी पढ़े : जनसंख्या विस्फोट क्या आर्थिक मंदी का कारण है?


तेजप्रताप यादव ने तेजस्‍वी यादव से शिवहर और जहानाबाद सीट पर अपने उम्मीदवार अंगेश कुमार और चंद्रप्रकाश को टिकट देने की मांग की थी, लेकिन छोटे भाई नहीं माने. दोनों भाइयों के बीच मनमुटाव का असर है कि बिहार में आरजेडी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली. तेजप्रताप और तेजस्वी के बीच चल रहे घमासान का खामियाजा पूरे बिहार में महागठबंधन को उठाना पड़ा है. राजद की अगुआई वाले महागठबंधन को लोकसभा चुनावों में 40 में से 39 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है. इस हार के बाद कांग्रेस और रालोसपा जैसे दलों ने भी सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं.

जहानाबाद में राजद और जेडीयू के बीच का चुनावी मुकाबला काफी कठिन माना जा रहा था. चुनाव परिणाम सामने आने के बाद इसकी पुष्टि भी हुई, जब हार-जीत का फासला महज 1,711 मतों का रहा. इस सीट से जेडीयू के चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी ने राजद के सुरेंद्र यादव को हराया. सुरेंद्र यादव को जहां 3,33,833 वोट मिले, वहीं चंद्रवंशी को 3,35,584 वोट प्राप्‍त हुआ. जहानाबाद से ही तेजप्रताप के उम्मीदवार चंद्रप्रकाश को 7,755 वोट मिले.  

पटना में जितना दबदबा लालु यादव का था उतना उनके बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव नहीं बना पा रहे.

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Related Articles