चमकी बुखार से बिहार में मचा हड़कंप, अब तक 57 लोगों की मौत...एक्शन में मोदी सरकार

संक्षेप:

  • बिहार के कई जिलों में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानि AES का कहर जारी है
  • आधिकारिक जानकारी के अनुसार अब तक 35 बच्चों की जान जा चुकी है जबकि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब तक इससे 48 बच्चों की मौत हो चुकी है
  • संकट गहराता जा रहा है और राज्य प्रशासन इसे संभाल पाने में अब तक नाकाम साबित हुआ है

बिहार के कई जिलों में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानि AES का कहर जारी है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार अब तक 35 बच्चों की जान जा चुकी है जबकि न्यूज़18 की रिपोर्ट के अनुसार अब तक इससे 48 बच्चों की मौत हो चुकी है. जाहिर है संकट गहराता जा रहा है और राज्य प्रशासन इसे संभाल पाने में अब तक नाकाम साबित हुआ है. ऐसे में आज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सुदान मुजफ्फरपुर पहुंचेंगे.जबकि आज ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्वनी कुमार चौबे भी AES के प्रकोप से उत्पन्न हालात का जायजा लेने मुजफ्फरपुर पहुंचेंगे.

बता दें कि बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की डॉक्टरों की केंद्रीय जांच टीम मुजफ्फरपुर के SKMCH पहुंची. इनमें डॉक्टर अरुण कुमार सिन्हा के नेतृत्व में डॉ. गोयल, डॉ. पूनम, पटना AIIMS के डॉ. लोकेश और NCDC पटना के डॉ. राम सिंह शामिल हैं.बिगड़ते हालात के बीच प्रधान सचिव ने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है. बता दें कि मंगलवार तक स्वास्थ्य विभाग 11 ही बच्चों की मौत ही मान रहा था. बहरहाल, प्रधान सचिव ने यह भी स्वीकार किया कि 84 बच्‍चों का अब भी इलाज चल रहा है. उन्होंने कहा कि बिहार के 12 जिलों में AES का प्रभाव है. बीमारी के कहर को देखते हुए चार ICU चालू किए गए हैं, फिर भी बेड कम पड़ रहे हैं.प्रधान सचिव के अनुसार 28 बच्चों की मुजफ्फरपुर के SKMCH और 7 की मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई है. 12 प्रभावित जिलों के 222 पीएचसी में इसके इलाज की व्यवस्था की गई है. गौरतलब है कि सोमवार को बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कहा था कि अभी तक 11 बच्चों के मौत की पुष्टि हुई है, लेकिन इसमें AES यानी इन्सेफेलाइटिस से नहीं बल्कि 10 बच्चों की मौत हाईपोगलेसिमिया से हुई है, जबकि एक बच्चे की मौत जापानी इन्सेफेलाइटिस से हुई है.

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