PMCH में एंबुलेंस का इंतजार करता रहा दुनिया के महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पार्थिव शरीर

संक्षेप:

  • महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन गुरुवार को पटना के पीएमसीएच में हो गया.
  • दुनियाभर से चर्चित गणितज्ञों में शुमार किए जाने वाले वशिष्ठ नारायण निधन के बाद भी सरकारी उपेक्षा के शिकार बने और काफी देर तक उनका शव एंबुलेंस का इंतजार करता रहा.
  • वशिष्ठ नारायण सिंह ने महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती दी थी.

पटना: महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन गुरुवार को पटना के पीएमसीएच में हो गया, लेकिन दुनियाभर से चर्चित गणितज्ञों में शुमार किए जाने वाले वशिष्ठ नारायण निधन के बाद भी सरकारी उपेक्षा के शिकार बने और काफी देर तक उनका शव एंबुलेंस का इंतजार करता रहा.
परिजनों के साथ पटना के कुल्हरिया कांप्लेक्स के पास रहने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह की तबीयत आज सुबह अचानक खराब हो गई. बताया जा रहा है कि आज तड़के उनके मुंह से खून निकलने लगा. जिसके बाद उन्हें तत्काल परिजन पीएमसीएच लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
परिजनों का आरोप है कि वशिष्ठ नारायण सिंह की मृत्यु के 2 घंटे तक उनकी लाश अस्पताल के बाहर पड़ी रही. 2 घंटे के इंतजार के बाद एबुंलेंस उपलब्ध कराया गया.गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे. जब वह पीएमसीएच में भर्ती थे तो उनका हालचाल जानने के लिए नेताओं का तांता लगा रहा. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर केंद्रीय मंत्री तक उन्हें देखने गए थे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके निधन पर शोक जता चुके हैं.

सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती

वशिष्ठ नारायण सिंह ने महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती दी थी. उनके बारे में यह भी मशहूर है कि नासा में अपोलो की लांचिंग से पहले जब 31 कंप्यूटर कुछ समय के लिए बंद हो गए तो कंप्यूटर ठीक होने पर उनका और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक जैसा ही रहा था. महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने 1969 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की. इसके बाद वह वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए. वशिष्ठ नारायण ने नासा में भी काम किया, लेकिन वह 1971 में भारत लौट आए.

ये भी पढ़े : सीएम योगी के जन्मदिन के मौके पर गोरखपुर में बीजेपी नेताओं ने किया वृक्षारोपण


नहीं जाने दिया गया अमेरिका

भारत लौटने के बाद वशिष्ठ नारायण ने आईआईटी कानपुर, आईआईटी बंबई और आईएसआई कोलकाता में नौकरी की. 1973 में उनकी शादी वंदना रानी से हो गई. शादी के कुछ समय बाद 1974 में उन्हें मानसिक दौरे आने लगे. 1975 में वह मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया रोग से पीड़ित हो गए. इस बीमारी से ग्रसित होने के बाद उनकी पत्नी ने उनसे तलाक ले लिया. कहा जाता है कि 1976 में इलाज और उनकी सारी जिम्मेदारी लेने को अमेरिका तैयार था, लेकिन परिजनों का आरोप है कि सरकार ने उन्हें अमेरिका जाने नहीं दिया और राजनीति के तहत 1976 से 1987 तक रांची के मेंटल हास्पिटल में भर्ती कराकर उनकी प्रतिभा को कुचल दिया गया.

If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Related Articles