क्या लालू प्रसाद की जगह लेगें तेजस्वी यादव, बनेंगे RJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष? हो रही है सियासी चर्चा

संक्षेप:

  • तेजस्वी यादव के पटना पहुंचते ही राजद विधायकों के सुर इस बात को लेकर मुखर हो गए हैं कि उनको अब पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए.
  • इस मांग की शुरुआत राजद के वरिष्ठ नेता भाई वीरेंद्र (Bhai Virendra) ने की है.
  • मनेर के विधायक ने कहा कि वह पार्टी की बैठक में यह प्रस्ताव लाएंगे की जल्द से जल्द तेजस्वी यादव को राजद का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए.

पटना: बिहार में नेता प्रतिपक्ष और लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के छोटे बेटे तेजस्वी यादव (Tejasvi Yadav) 42 दिन के अज्ञातवास के बाद मंगलवार की शाम को पटना पहुंचे. तेजस्वी यादव के पटना पहुंचते ही राजद (RJD) विधायकों के सुर इस बात को लेकर मुखर हो गए हैं कि उनको अब पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए. इस मांग की शुरुआत राजद के वरिष्ठ नेता भाई वीरेंद्र (Bhai Virendra) ने की है. मनेर के विधायक ने कहा कि वह पार्टी की बैठक में यह प्रस्ताव लाएंगे की जल्द से जल्द तेजस्वी यादव को राजद का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए.

MLA का दावा

राजद विधायक ने यह भी दावा किया कि पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं का भी मन है कि तेजस्वी यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनें. इस बात को लेकर पार्टी के कई विधायकों की आपस में सहमति भी है. तेजस्वी यादव को लेकर भाई वीरेंद्र द्वारा दिए गए इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं. माना जा रहा है कि तेजस्‍वी के पिता और पार्टी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से भी इस बात के संकेत मिल गए हैं कि आने वाले दिनों में तेजस्वी ही पार्टी को लीड करेंगे.

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गैरमौजूदगी में रद्द हुई थी बैठक

तेजस्वी की गैरमौजूदगी में पार्टी की दो अहम बैठकों को रद्द किया गया था. लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से तेजस्‍वी यादव लगातार गायब थे. वह 9 जुलाई को पटना से गए थे और 42 दिन के लंबे अंतराल के बाद 20 अगस्त को वापस लौटे. पार्टी सूत्रों की मानें तो तेजस्वी यादव के आने के बाद जल्द ही अब पार्टी की अहम बैठक पटना में होगी.

आरक्षण को लेकर तेजस्वी का ट्वीट

तेजस्वी यादव ने पटना आने से पहले ट्वीट कर कहा था, `आरक्षण को लेकर आरएसएस/बीजेपी की मंशा ठीक नहीं है. बहस इस बात पर करिए कि इतने वर्षों बाद भी केंद्रीय नौकरियों में आरक्षित वर्गों के 80% पद ख़ाली क्यों हैं? उनका प्रतिनिधित्व सांकेतिक भी नहीं है. केंद्र में एक भी सचिव ओबीसी/ईबीसी से क्यों नहीं है? कोई कुलपति एससी/एसटी/ओबीसी क्यों नहीं है? इस पर बहस कीजिए.`

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