लोहा बेचने में 12 सौ रु. प्रति टन का नुकसान उद्योगपति बोले: ऐसे में तो बंद हो जाएंगे उद्योग

संक्षेप:

पंजाब से स्टील प्रोडक्ट्स के गलत दाम हो रहे वायरल, शिकायत पर रायपुर थाने में जुर्म दर्ज

कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन से उबरने के बाद अब उद्योगों को स्टील से जुड़े प्रोडक्ट बनाने में लागत बढ़ गई है। इसके बावजूद मार्केट में कुछ लोग गलत रेट वायरल कर देने रहे हैं। इसका नुकसान उद्योगपतियों को हो रहा है। उन्होंने बताया कि दूसरे प्रदेशों के मार्केट में लोहे के दाम की मनमानी कीमत सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापारियों में वायरल की जा रही है। इससे व्यापारियों को सीधे तौर पर 12 सौ से 13 सौ रुपए प्रति टन का नुकसान हो रहा है। हालात ऐसे ही रहे तो हफ्तेभर में आधा दर्जन उद्योग बंद हो जाएंगे। मामले में उद्योगपतियों ने रायपुर थाने में भी रिपोर्ट दर्ज कराई है। रायगढ़ जिले में पूंजीपथरा स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में इन्गॉट और बीलेट बनाई जाती है, जिसकी सप्लाई उत्तरप्रदेश, दिल्ली के साथ रायपुर में होती है। गलत दाम वायरल होने से पिछले कुछ दिनों से यहां उद्योगपतियों को नुकसान हो रहा है। संचालकों ने बताया कि पंजाब के लोहे मंडी से लोहा व्यापारियों को गलत मैसेज भेजे जा रहे हैं। मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने इसकी शिकायत रायपुर एसपी से की थी। मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी। उद्योगपतियों का आरोप है कि पंजाब में इस काम में कुछ सटोरिए जुड़े हैं, जो पूरा कारोबार अपने तरीके से चलाना चाह रहे है। वे मार्केट में गलत मैसेज भेज रहे हैं। मामले में रायगढ़ के उद्योगपतियों कहना हैं कि यदि इसी तरह से लगातार नुकसान होता रहा तो कुछ दिनों में यहां के उद्योगपति भी पंजाब के गोविंदगढ़ के सटोरियों के खिलाफ में एफआईआर दर्ज कराएंगे। उद्योग संघ के सचिव अरविंद शर्मा ने बताया कि पूंजीपथरा इंडस्ट्रियल एरिया में 40 स्पंज आयरन और 10 रोलिंग मिल(जहां टीएमटी बनती है) है जिसमें इन्गॉट, बीलेट और टीएमटी सरिया बनाई जाती है। सटोरिए के फाल्स मैसेज से सभी स्टील प्रोडक्ट्स के दाम प्रभावित हो रहे हैं। कई बार मजबूरी में कम दाम में स्टील बेचना पड़ रहा है। इससे उन्हें 12 सौ से 13 सौ रुपए का नुकसान हो रहा है। इस नुकसान को राेकने के लिए वे भी रायगढ़ थाने में जल्द ही मामला दर्ज कराएंगे।

मनमानी... बैठे-बैठे ही ऑनलाइन तय कर दे रहे रेट


उद्योगपति अरविंद शर्मा ने बताया कि भारत में सेकंडरी स्टील का एक दिन में उत्पादन 3 लाख 50 हजार से 4 लाख मीट्रिक टन है। इसके रेट को कुछ दिनों से नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड में कंप्यूटर में बैठकर ही ऑनलाइन तय कर दिए जा रहे हैं। नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड में हर रोज 20 से 30 हजार मीट्रिक टन का कारोबार होता है। कमोडिटी एक्सचेंज में ज्यादातर लोग आपस में खरीद बेच का काम करते है। इसकी वास्तविक डिलीवरी कम होती है। रायपुर, रायगढ़ सहित दूसरे शहरों में स्टॉक पाइंट भी नहीं है, लेकिन यह भारत के स्टील उत्पादन को प्रभावित करता है। उद्योगपतियों कहना हैं कि नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड द्वारा जो रेट तय की जा रही है, उसे बंद कराई जाए। इसी से ही कारोबार प्रभावित हो रहा है।

इस तरह हो रहा नुकसान


उद्योगपति योगेश अग्रवाल बताते हैं कि इंडस्ट्री में इन्गॉट और बिलेट 11 हजार रुपए प्रति टन बनकर मार्केट में बेचने के लिए भेजा जाता है। जब कि बाजार में अब 9800 प्रति टन का मैसेज वायरल किया जा रहा है। इससे उद्योगपतियों को प्रति टन 12 सौ रुपए का नुकसान हो रहा है। यदि ऐसा नुकसान लगातार होता रहा तो आने वाले समय में उनका काम प्रभावित हो सकता है। उद्योगपति ललित शर्मा बताते हैं कि अभी मार्केट में टीएमटी से लेकर स्टील प्रोडक्ट्स की डिमांड भी कम हुई है।

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