67038.88 टन धान समितियों में चौकीदारों के भरोसे करोड़ों का धान

संक्षेप:

16922 टन की रिकार्ड खरीदी, समितियों से उठाव सिर्फ 49880 टन का

इस वर्ष जिले में धान की रिकार्ड खरीदी हुई है। जिले भर की 30 धान खरीदी केन्द्रों में 116922 मैट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। पर धान का उठाव की गति शुरू से ही बेहद धीमी रही। डीओ कटने की जटिल प्रक्रिया और मिलरों द्वारा समय पर उठाव नहीं किए जाने से खरीदी के आखरी दिन तक सिर्फ 49880 टन की धान खरीदी हो सकी थी। समितियों में अभी भी 67038.88 टन धान पड़ा है। जिसके डीओ काटने व उठाव के काम चल रहे हैं। धान खरीदी भले ही बंद हो चुकी है पर धान खरीदी केन्द्र में धान की बोरियां की झल्लियां लगी हुई हैं। बीते सप्ताह हुई बारिश को देखते हुए सभी समितियों में धान को कैप कवर से ढंका गया था। हालांकि अभी बारिश की उम्मीद कम है पर समितियों में पहले जैसी चलह-पहल नहीं है। ऐसी स्थिति में धान की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग का कहना है कि धान की सुरक्षा की जिम्मेदारी समिति के ऊपर है और सभी समितियों में चौकीदार नियुक्त हैं। चौकीदार खरीदी केन्द्रों में रखे गए धान की पहरेदारी कर रहे हैं।

कई जगहों पर खुले में रखे हैं धान


धान की बोरियां अधिकांश केन्द्रों में खुले में रखी हुई हैं। कई केन्द्र ऐसे हैं जहां ना तो शेड है और ना ही बाउंड्रीवॉल। जबतक धान खरीदी चल रही थी तबतक पंजीयन सहित अन्य कामों को लेकर खरीदी केन्द्रों में चलह-पहल बनी हुई थी। पर अब खरीदी केन्द्र वीरान हैं। खुले आसमान के नीचे मैदान में रखी बाेरियों को चोरी होने से बचाने के लिए चौकीदार रात भर समितियों में जग रहे हैं। विभाग ने जल्द उठाव करने की बात कही है।


समितियों को दिया जाता है खर्च


"धान की सुरक्षा की जिम्मेदारी समिति की होती है। समितियों में सुरक्षा, रख-रखाव सहित सभी चीजों का खर्च दिया जाता है। सभी समितियों में चौकीदार हैं जो धान की रखवाली कर रहे हैं। उठाव का काम भी जारी है। जल्द ही सभी धान खरीदी केन्द्रों से उठाव पूरा कर लिया जाएगा।``
-जीएस कंवर, जिला खाद्य अधिकारी

ये भी पढ़े : अच्छी खबर: अब से नोएडा में ग्रामीण इलाके में होगी ऑक्सीजन भरने की सुविधा, पूरे जिले को पांच हिस्सों में बांटा गया 


If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

अन्य रायगढ़ की अन्य ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें और अन्य राज्यों या अपने शहरों की सभी ख़बरें हिन्दी में पढ़ने के लिए NYOOOZ Hindi को सब्सक्राइब करें।

Related Articles