Jharkhand: हेमंत सोरेन बने हीरो, कांग्रेस पर लोगों ने जताया भरोसा

संक्षेप:

  • मतगणना के अब तक के रुझानों से स्‍पष्‍ट है कि कांग्रेस को राज्‍य के सबसे युवा मुख्‍यमंत्री रह चुके हेमंत सोरेन पर भरोसा करना फायदे का सौदा साबित हुआ.
  • कांग्रेस ने अक्‍टूबर में सीटों के बंटवारे को लेकर हुई बातचीत में जेएमएम को राज्‍य में बड़े भाई के तौर पर स्‍वीकार कर लिया था.
  • 2013 में झारखंड के सबसे युवा और 5वें मुख्‍यमंत्री बने थे हेमंत.

रांची: झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 (Jharkhand Assembly Election 2019) के लिए पांच चरणों में हुए मतदान के बाद अब उसके नतीजे भी करीब-करीब साफ हो गए हैं. अभी तक के रुझानों के मुताबिक, राज्‍य में सत्‍तारूढ़ बीजेपी (BJP) 28 सीटों पर आगे चल रही है. वहीं, पूर्व सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) के नेतृत्‍व वाला झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), कांग्रेस (Congress) और आरजेडी (RJD) का गठबंधन 41 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. इसके अलावा राज्‍य की रघुबर दास (Raghubar Das) सरकार में सहयोगी अजसू (AJSU) 5 सीटों पर आगे चल रही है. इस बार अजसू ने बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़ा है. झारखंड विकास मोर्चा (JVM) 4 और अन्‍य 3 पर बढ़त बनाए हुए हैं. कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनाव में 6 सीटों पर जीत से संतोष करना पड़ा था, लेकिन इस बार पार्टी 12 सीट पर बढ़त बनाए हुए है. वहीं झामुमो अकेले 25 सीटों पर आगे चल रही है. यहां कांग्रेस को पिछली बार के मुकाबले 5 सीटों का बढ़त होता दिख रहा है, वहीं झामुमो की छह सीटें बढ़ी हैं.

कांग्रेस ने कहा था, हेमंत को सीएम प्रत्‍याशी मानने में परेशानी नहीं

मतगणना के अब तक के रुझानों से स्‍पष्‍ट है कि कांग्रेस को राज्‍य के सबसे युवा मुख्‍यमंत्री रह चुके हेमंत सोरेन पर भरोसा करना फायदे का सौदा साबित हुआ. कांग्रेस ने अक्‍टूबर में सीटों के बंटवारे को लेकर हुई बातचीत में जेएमएम को राज्‍य में बड़े भाई के तौर पर स्‍वीकार कर लिया था. कांग्रेस ने स्‍पष्‍ट कर दिया था कि JMM के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर स्वीकार करने में पार्टी को कोई परेशानी नहीं है. कांग्रेस की तरफ से इस बात के संकेत झारखंड से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू (Dhiraj Sahu) ने दिए थे. साहू ने साफ कर दिया था कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने पहले ही इस बारे में हेमंत सोरेन को आश्वासन दे दिया है.

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2013 में झारखंड के सबसे युवा और 5वें मुख्‍यमंत्री बने थे हेमंत

हेमंत सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हैं. वह अपने पिता शिबू सोरेन (Shibu Soren) की तरह राज्य के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. साल 2013 में हेमंत सोरेन आरजेडी (RJD), कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों की मदद से झारखंड के 5वें मुख्यमंत्री बनने में कामयाब हुए थे और दिसंबर 2014 तक पद पर रहे. साल 1975 में जन्मे हेमंत सोरेन कम उम्र में ही अपनी राजनीतिक सूझबूझ का परिचय दे चुके थे. शिबू सोरेन की विरासत को संभालना उनके लिए किसी जोखिम से कम नहीं था, लेकिन हेमंत सोरेन ने समय-समय पर अपनी काबिलियत का परिचय देकर यह साबित कर दिया कि राजनीति के टेढ़े-मेढ़े रास्ते पर चलने की क्षमता उनमें है.

जेएमएम ने कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ा था आम चुनाव

हेमंत के कंधों पर प्रदेश में महागठबंधन को जीत दिलाने की जिम्मेदारी थी. वह खुद दो सीटों से चुनाव मैदान में थे. हेमंत जेएमएम का गढ़ माने जाने वाले संथाल परगना की दुमका विधानसभा सीट के साथ ही बरहेट सीट से भी चुनावी ताल ठोक रहे थे. शुरुआती रुझान में हेमंत सोरेन दुमका से पीछे और बरहेट से आगे चल रहे हैं. बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में हेमंत ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के साथ मिलकर थर्ड फ्रंट बनाने की कोशिश भी की थी. वह यूपीए की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी की ओर से दिल्ली में दिए गए डिनर में भी शामिल हुए. बाद में लोकसभा चुनाव 2019 के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा कांग्रेस नीत महागठबंधन में शामिल हो गया.

दुमका सीट पर बीजेपी की लुईस मरांडी ने 2014 में हराया

दुमका विधानसभा सीट से बीजेपी की लुईस मरांडी विधायक हैं. लुईस ने 2014 के चुनाव में हेमंत सोरेन को 5,262 वोटों से हराया था. इससे पहले विधानसभा चुनाव 2005 में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार स्टीफन मरांडी ने चुनाव जीता था. इस सीट से 2009 में हेमंत विधायक चुने गए, लेकिन 2014 में उन्हें बीजेपी की लुईस मरांडी से मात खानी पड़ी. हालांकि, बरहेट के मतदाताओं ने सोरेन को जिताकर विधानसभा भेजा और वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने. बीजेपी ने इस बार सोरेन की उन्हीं के गढ़ में तगड़ी घेरेबंदी की और दुमका के साथ ही बरहेट में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने चुनावी जनसभाओं को संबोधित किया.

राज्‍य में शराब बिक्री पर पाबंदी के पक्षधर रहे हैं जेएमएम प्रमुख झारखंड के मुख्यमंत्री बनने से पहले हेमंत सोरेन उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. अर्जुन मुंडा के कार्यकाल में हेमंत ने उपमुख्यमंत्री पद को संभाला है. स्वभाव से बेहद सरल हेमंत पिता की तरह ही लोगों से सीधा संवाद रखने में विश्वास करते हैं. हेमंत राज्य में शराब बिक्री पर पांबदी लगाने के पक्षधर हैं. उनका मानना है कि झारखंड के गांवों में खासतौर पर शराब की दुकानें नहीं खुलनी चाहिए क्योंकि राज्य के भोले-भाले आदिवासी शराब के नशे में चूर होकर जिंदगी की दौड़ में पिछड़ते चले जाएंगे. उनका मानना है कि राज्य की महिलाओं को आगे बढ़कर शराब बिक्री का विरोध करना होगा. तभी राज्य सरकार गांवों में शराब का लाइसेंस बांटने का निर्णय वापस ले सकेगी.

एक लड़की की भूख से मौत की सीबीआई जांच की मांग की थी

हेमंत सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के विरोधी हैं. उनका मानना है कि इससे कई गरीब सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं. साल 2017 में कथित भुखमरी की वजह से सिमडेगा में एक लड़की की मौत की वजह का पता लगाने के लिए उन्होंने सीबीआई (CBI) जांच की मांग की थी. इसके लिए उन्होंने राज्य की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को भी आड़े हाथ लिया था. हेमंत सोरेन मानते हैं कि आधार (Aadhar) नंबर के बिना राशन नहीं दिया जाना सरकार का अमानवीय पहलू है. राज्य के आदिवासियों के हितों की रक्षा करने का हेमंत सोरेन कोई भी मौका गंवाना नहीं चाहते हैं.

हेमंत ने ग्‍लोबल इंवेस्‍टर्स मीट को बताया था लैंड ग्रैबर्स मीट

`छोटा नागपुर टीनेंसी एक्ट` और `संथाल परगना टीनेंसी एक्ट` में बदलाव की कोशिशों का हेमंत सोरेन ने जबर्दस्त विरोध किया था. दरअसल, इन दोनों एक्ट में बदलाव कर राज्य सरकार साल 2016 में उन जमीनों पर सड़क, ह़ॉस्पिटल और शैक्षणिक संस्थान बनवाना चाह रही थी. हेमंत सोरेन ने इसका जमकर विरोध किया. झारखंड में 2017 में ग्लोबल इंवेस्टर्स मीट में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने हेमंत सोरेन को शिरकत करने का न्‍योता भेजा, लेकिन उन्‍होंने उसे लैंड ग्रैबर्स मीट (जमीन हड़पने वाला सम्मेलन) बताकर शामिल होने से इनकार कर दिया. हेमंत ने अपने पिता शिबू सोरेन के साथ एससी-एसटी एक्ट (SC/ST Act) में बदलाव के विरोध में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) से भी मुलाकात की थी.

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