यूपी में कोल संकट पर कुछ भी बोलने से कोयला मंत्री ने किया इनकार

संक्षेप:

  • मंगलवार को एनसीएल मुख्यालय पहुंचे प्रह्लाद जोशी।
  • एनसीएल प्रबंधन के साथ कोयला उत्पादन और प्रेषण की समीक्षा की।
  • कहा- बिजली उत्पादन में नहीं होगी कोयले की कमी।

वाराणसी- केंद्रीय कोयला, खान एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी मंगलवार को एनसीएल मुख्यालय (मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिला) पहुंचे। उन्होंने एनसीएल प्रबंधन के साथ कोयला उत्पादन और प्रेषण की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने देश के बिजली संयंत्रों को निर्बाध कोयला आपूर्ति के लिए एनसीएल के प्रयासों की सराहना की और इसमें और तेजी लाने के निर्देश दिए।

केंद्रीय कोयला मंत्री ने कहा कि बिजली उत्पादन करने वाली परियोजनाओं के संचालन में कोयले की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। एनसीएल के दौरे पर आए केंद्रीय कोयला मंत्री ने यह भरोसा मंगलवार को सोनभद्र जिले में एनसीएल दुद्धीचुआ परियोजना के अतिथि गृह में हुई तापीय परियोजना के अधिकारियों संग बैठक में दिया। हालांकि कोयला संकट के सवालों पर कुछ भी बोलने से उन्होंने इनकार कर दिया।

केंद्रीय मंत्री मंगलवार की दोपहर सिंगरौली स्थित एनसीएल मुख्यालय पहुंचे। हेलीपैड पर एनसीएल के अधिकारियों और सिंगरौली के कलेक्टर राजीव रंजन मीणा, एसपी वीरेंद्र सिंह ने उनका स्वागत किया। निरीक्षण के दौरान केंद्रीय मंत्री ने निगाही व्यू प्वाइंट से खदान का अवलोकन किया। निगाही परियोजना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ खदान संचालन पर चर्चा कर उत्पादन और प्रेषण में तेजी लाने के निर्देश दिए।

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मंत्री ने परियोजना के सर्वश्रेष्ठ कामगारों को सम्मानित किया और खदान में तैनात खनिकों की टीम को उत्पादन और प्रेषण में बढ़ोतरी के लिए प्रेरित किया। कोयला मंत्री ने दुद्धीचुआ रेलवे साइडिंग का निरीक्षण किया। यहां फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) के तहत 10 मिलियन टन वार्षिक क्षमता के नए साइलो की आधारशिला भी रखी।

मेक इन इंडिया के तहत तैयार डंपर को दिखाई हरी झंडी

कोयला मंत्री ने निगाही परियोजना में मेक इन इंडिया के तहत तैयार 190 टन भार वहन क्षमता के स्वदेशी इलेक्ट्रिक डंपर को हरी झंडी दिखाई। पौधरोपण कर खदानों के चारों ओर हरित आवरण को बढ़ाने का संदेश दिया।

जयंत में देखा गंगा ड्रैगलाइन व सरफेस माइनर का संचालन
मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एनसीएल जयंत ओसीपी का भी दौरा किया। जयंत एनसीएल की बड़ी कोयला खदानों में से एक है। सर्वप्रथम उन्होंने जयंत व्यू पॉइंट का दौरा कर खदान का अवलोकन किया। खदान में संचालित गंगा ड्रैगलाइन व सरफेस माइनर का संचालन देखा।

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