तीन तलाक पीडितों के लिए देश की पहली पेंशन योजना वाराणसी में शुरू

संक्षेप:

  • तलाक पीड़ित महिलाओं को पांच सौ रुपये महीने की पेंशन योजना शुरू की
  • तीन तलाक़ पीड़ित महिलाओं को पांच सौ रुपये की पेंशन और पासबुक दिया गया
  • पेंशन पाकर तलाकशुदा महिलाओं हुई खुश 

तीन तलाक़ पीड़ितों को देश में पहली बार पेंशन देने की शुरुवात वाराणसी से हुई है। सुभाष जयंती पर विशाल भारत संस्थान और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने तलाक पीड़ित महिलाओं को पांच सौ रुपये महीने की पेंशन योजना शुरू की। आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार के हाथों तीन तलाक़ पीड़ित महिलाओं को पांच सौ रुपये की पेंशन और पासबुक दिया गया। यह देश का पहला गैर सरकारी पेंशन योजना है। जो तीन तलाक की पीड़ितों के लिए शुरू किया गया है। इस मौके पर इंद्रेश कुमार ने फिल्म पद्मावती को लेकर कहा कि फिल्म से जिनके सेंटिमेंट्स को धक्का पंहुचा है, निर्माताओं को उन्हें फिल्म दिखानी चाहिए।  वहीं इंद्रेश कुमार ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय को राष्ट्र विरोधी भावनाओं से बचाने की अपील किया।  

काशी नगरी में देश का पहला गैर सरकारी पेंशन योजना की शुरुआत कि गई। पेंशन योजना की शुरुआत काशी के महात्मा गांधी विद्यापीठ के परिसर में किया गया। राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव स्मृति पेंशन योजना और इंद्रेश कुमार तीन तलाक पीड़ित मुस्लिम महिला पेंशन योजना का शुभारंभ आरएसएस के विचारक इंद्रेश कुमार ने किया। इस मौके पर इंद्रेश कुमार ने पेंशन शुरू किए जाने को लेकर कहा कि यह  एक सकारात्मक प्रयास है और इसमें समाज को जुड़ने की जरूरत है ताकि हम ज्यादा संख्या में तीन तलाक़ पीड़ितों को पेंशन के रूप में सहायता दे सकें। इंद्रेश कुमार ने कहा कि तीन तलाक़ की पीड़िताओं की मदद के लिए लोग आगे आ रहे हैं।

वहीं पेंशन पाकर महिलाएं काफी खुश थीं। महिलाओं का कहना था कि इनकी मदद के लिए हम सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं रह सकते समाज को भी इसके लिए आगे आना होगा। जिन पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को ये पेंशन मिला है। उन्होंने संस्था को धन्यवाद दिया है। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि पांच सौ रुपये माहवार का सहयोग हमारे लिए एक बड़ी राहत है।

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कार्यक्रम के बाद इंद्रेश कुमार ने जेएनयू को लेकर कहा कि पिछले तीस-चालीस सालों से जेएनयू  में एक ऐसा माहौल बनाया गया। जिससे राष्ट्र विरोधी भावनाएं वहां प्रबल हैं। वाराणसी के लोगों की ये जिम्मेदारी है की अबतक ऐसे माहौल से जो बीएचयू बचा हुआ है। उसको बचाएं रखें। पद्मावती फ़िल्म पर भी इंद्रेश कुमार ने कहा कि अगर फिल्म से जुड़े 1200 लोगों का मानवाधिकार है तो पांच करोड़ राजपूतों का भी मानवाधिकार है। घूमर नृत्य अठारहवीं सदी का नृत्य है इसे बारहवीं सदी में दिखाकर फ़िल्म निर्माता ने सेंटिमेंट्स हर्ट किए हैं। बेहतर है की जिनके सेंटिमेंट्स को धक्का पहुंचा है उन्हीं को फिल्म निर्माता ये फिल्म दिखाएं।

 

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