आइआइटी-बीएचयू अब स्वच्छ कोयला उत्पादन व खपत की तकनीक सिखाएगा

वाराणसी, बिना कोयला जलाए ही ऊर्जा प्राप्त करने की तकनीक पर काम करने को आइआइटी स्थित देश के सबसे पुराने खनन विभाग में मिनी रत्न कंपनी नार्दर्न कोलफील्ड्स लि. (एनसीएल) के सहयोग से एक अनुसंधान केंद्र खोला जाएगा।

इसे विभाग में स्थापित करने के लिए गुरुवार को आइआइटी और एनसीएल में मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया।

इसे कोल क्वालिटी मैनेजमेंट एंड यूटिलाइजेशन रिसर्च सेंटर कहा जाएगा।

इस केंद्र को शुरू करने को एनसीएल करीब पौने दो करोड़ की आर्थिक मदद भी उपलब्ध कराएगा।

कार्बन फुट प्रिंट की समस्या से दिलाएंगे निजात आइआइटी के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन के अनुसार पर्यावरण को कार्बन फुट ङ्क्षप्रट की समस्या से निजात दिलाने के लिए बेहतर तकनीक विकसित की जाएगी।

यह देश में पहली एकेडमिक-इंडस्ट्री पहल है, जिसके तहत शोधार्थी व उद्यम विशेषज्ञ एक साथ कार्य करेंगे।

अनुसंधान के तहत कोयले की गुणवत्ता बढ़ा कर किस तरह कार्बन कम करें, इसकी भी तकनीक ईजाद होगी।

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