महाशिवरात्रि विशेष: क्यों मनाया जाता है महाशिवरात्रि का पर्व, जानें इसका महत्व

संक्षेप:

  • क्यों मनाया जाता है महाशिवरात्रि ?
  • क्या है महाशिवरात्रि की महत्ता?
  • कैसे करे महाशिवरात्रि का अनुष्ठान?

शिवरात्रि तो हर महीने में आती है लेकिन महाशिवरात्रि साल में एक बार आती है। फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। महाशिवरात्रि मासिक शिवरात्रि से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस बार महाशिवरात्रि 11 मार्च दिन ब्रृहस्पतिवार को मनाया जा रहा है।

क्या है महत्व

माना जाता है कि सृष्टि का आरम्भ इसी दिन से हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव पहली बार प्रकट हुए थे। शिव का प्राकटय अग्निलिंग यानी अग्नि के शिवलिंग के रूप में हुआ था।

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शिव और शक्ति का हुआ था मिलन

महाशिवरात्रि को पूरी रात शिवभक्त अपने आराध्य का जागरण करते हैं। शिवभक्त इस दिन भगवान शिव औऱ देवी पार्वती के विवाह का उत्सव मनाते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि को शिव और शक्ति का विवाह हुआ था। इसी दिन शिवजी ने वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था। शिव जो वैरागी थे, वह गृहस्थ बन गए थे।

आध्यातमिक रूप से इसे प्रकृति और पुरुष के मिलन की रात के रूप में बताया जाता है।

कैसे किया जाता है महाशिवरात्रि का अनुष्ठान

महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव का अभिषेक अनेकों प्रकार से किया जाता है। मुख्य रूप से अभिषेक में पांच चीजों का इस्तेमाल किया जाता है और इन्हीं से पंचामृत बनता है। ये हैं दूध, दही, घी, शहद और गुड़। इसके बाद जल से महादेव का स्नान करवाया जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि इन सभी चीजों को अर्पित करने के अपने अलग-अलग मायने हैं।

दूध: दूध से अभिषेक से लंबी आयु मिलती और आरोग्यता रहती है।

दही: ऐसी मान्यता है कि दही से अभिषेक संतान सुख की प्राप्ति होती है।

शहद : शहद से अभिषेक करने से धन की वृद्धि होती है। इसके साथ ही शहद से अभिषेक करने से पुरानी बीमारियां भी नष्ट हो जाती हैं।

घी: घी से अभिषेक भी धन में वृद्धि और आरोग्यता लाता है।

गुड़: गुड़ मिले दूध से अभिषेक करने से इंसान विद्वान हो जाता है।

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