वाराणसी: इस बार नरेंद्र मोदी नहीं PM मोदी लड़ रहे हैं चुनाव, गंगा भी उनसे मांगेगी कई सवालों का जवाब

संक्षेप:

  • वाराणसी में इस बार नरेंद्र मोदी नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं
  • गंगा की सफाई नमामि गंगे को लेकर प्रियंका ने मोदी से वाराणसी में पूछे हैं कई सवाल
  • दलित नेता चंद्रशेखर रावण देंगे मोदी को टक्कर

वाराणसी: लोकसभा चुनाव 2019 में इस बार वाराणसी सीट फिर से हॉट सीट बन गया है. वाराणसी में इस बार नरेंद्र मोदी नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं. 2014 में विपक्ष के कद्दावर नेता के रुप में नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से चुनाव लड़ा था और अब 2019 में प्रधानमंत्री मोदी चुनाव लड़ रहे हैं. 2014 में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मुझे बीजेपी ने वाराणसी नहीं भेजा है, ना ही मैं खुद आया हूं. मुझे ‘गंगा मां’ ने बुलाया है. अब यह भी तय है कि इस बार मां गंगा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कई सवालों का जवाब मांगेंगी.

गंगा की सफाई नमामि गंगे को लेकर प्रियंका ने मोदी से वाराणसी में पूछे हैं कई सवाल

कांग्रेस की महासचिव और वाराणसी संसदीय क्षेत्र समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री मोदी की गंगा सफाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं जैसे ज्वलंत मुद्दे पर उन्हें घेरने का अभियान शुरु कर दिया है. प्रियंका ने राजनीतिक लड़ाई का मुख्य ‘अखाड़ा’ वाराणसी को बनाया है. इस वजह से यहां पहले से अधिक रोचक मुकाबला होना तय है. प्रियंका प्रयागराज से गंगा के रास्ते वाराणसी तक ‘जल एवं रोड शो’ के लिए जरिये पिछड़े वर्ग को बखूबी साधने का काम कर चुकी है.

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दलित नेता चंद्रशेखर रावण देंगे मोदी को टक्कर

वैसे, उत्तर प्रदेश में बीजेपी से मुकाबले के लिए प्रमुख दल समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) ने गठबंधन बनाया है. गठबंधन के तहत वाराणसी सीट सपा के हिस्से आई है. कांग्रेस ने अब तक अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है, लेकिन इसी बीच भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ चुनावी मुकाबला करने की घोषणा कर सब को चौंका दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी एवं बीजेपी की विचारधारा का विरोध करने वाले तमाम नेता एवं दलों से समर्थन मांगा है. चंद्रशेखर को आम आदमी पार्टी (आप) का समर्थन भी मिलने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि सपा-बसपा गठबंधन के साथ आप एवं कांग्रेस का समर्थन मिलने की स्थिति में दलित नेता चंद्रशेखर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कड़ी टक्कर दे सकते हैं.

बीएसएफ से बर्खास्त हुए जवान तेज बहादुर लड़ेंगे मोदी के खिलाफ

पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनावी समर में उतरने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के बर्खास्‍त जवान तेज बहादुर यादव ने पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. तेज बहादुर ने बताया है कि `करीब दस हजार पूर्व सैनिक वाराणसी आकर असली चौकीदार के पक्ष में और नकली चौकीदार (पीएम मोदी) के खिलाफ घर-घर प्रचार करेंगे. वाराणसी में मीडिया से बातचीत मे तेज बहादुर ने बताया कि पीएम मोदी जिस दिन नामांकन करेंगे उसके अगले दिन वह पर्चा भरेंगे. तेज बहादुर के नामांकन जूलस में सेना और अर्धसैनिक बलों में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले हजारों बर्खास्‍त जवानों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे.

वाराणसी में नरेन्द्र मोदी ने तब क्या कहा था

वर्ष 2014 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेन्द्र मोदी ने इस प्राचीन धार्मिक नगरी के साथ-साथ अपने गृह राज्य गुजरात के वड़ोदरा संसदीय क्षेत्र से भी चुनावी मुकाबला किया था तथा दोनों जगहों पर भारी मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी. फिर, उन्होंने वड़ोदरा सीट से इस्तीफा देकर संसद में वाराणसी का प्रतिनिधत्व करने का फैसला किया था. बीजेपी द्वारा प्रधानमंत्री के उम्मीदवार घोषित होने के कारण तब नरेन्द्र मोदी ने कोई जोखिम नहीं लिया था और अपनी जीत पक्की करने के लिए दो जगहों से मुकाबला किया था. नरेन्‍द्र मोदी ने वड़ोदरा लोक सभा सीट से इस्‍तीफा देते समय कहा था कि वाराणसी का प्रतिनिधित्‍व करते हुए वह ‘गंगा की सेवा करने और वाराणसी के विकास के लिए कार्य करने की आशा करते हैं’.

क्या बड़े अंतर से जीतेंगे मोदी या मिलेगी कड़ी टक्कर

सत्ताधारी दल बीजेपी के नेताओं का कहना है कि जीत का अंतर बढ़ने में उन्हें कोई संदेह नहीं, लेकिन विरोधियों से लेकर कई आम नागरिकों को लगता है कि सपा-बसपा गठबंधन के साथ कांग्रेस का समर्थन किसी ‘ताकतवर’ नेता को मिला तो इस बार प्रधानमंत्री मोदी के लिए जीत की राह आसान नहीं होगी. ऐसे में दलित नेता चंद्रशेखर चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं. स्थानीय निवासी यह मानते हैं कि नरेन्द्र मोदी के यहां से सांसद होने के कारण कई सड़कों और बिजली की व्यवस्था में सुधार हुआ है, लेकिन जिस अस्सी घाट पर उन्होंने गंगा को स्वच्छ करने का संकल्प लिया था, उस दिशा में कोई खास काम नहीं हुआ. इसी घाट के पास नाले में तब्दील हो चुकी अस्सी नदी से मल एवं गंदा पानी पांच साल पहले की तरह आज भी गिर रहा है. इस पर कोई काम नहीं हुआ. सफाई के नाम पर कराड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए हैं. कई लोग रोजगार एवं किसानों के जमीन का उचित मुआवजा का मुद्दा उठा रहे हैं.

वहीं, बीएचयू की कई छात्राओं ने बेटियों की सुरक्षा को कागजी बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के दौरान पुलिस एवं विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों ने उन पर लाठी चार्ज किया. लोगों का यह आरोप भी है कि प्रधानमंत्री मोदी की अति महत्पूर्ण योजना ‘स्च्छ भारत अभियान’ की सफलता आमतौर पर उन्हीं इलाकों तक सिमट कर रह गई है, जहां वीआईपी नेताओं का आना जाना लगा रहता है, जबकि अधिकांश क्षेत्रों में सफाई आज भी भगवान भरोसे है.

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