City Star: गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल है वाराणसी की नौशीन

संक्षेप:

  • मुस्लिम बेटी नौशीन मंजूर गंगा जमुनी तहजीब का मिसाल बनी है
  • हिन्दू समुदाय के विलुप्त होते त्योहारों पर शोध कर रही हैं
  • विलुप्त होते त्योहारों को फिर से जीवंत करना है मकसद

काशी देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में गंगा जमुनी तहजीब के लिए जानी जाती है और इसी काशी की मुस्लिम बेटी नौशीन मंजूर गंगा जमुनी तहजीब का मिसाल बनी है। ये मुस्लिम बेटी हिन्दू समुदाय के विलुप्त होते त्योहारों पर शोध कर रही हैं। मकसद बस एक की इन विलुप्त होते त्योहारों को फिर से जीवंत करना है।   

बता दें, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कला संकाय के इतिहास विभाग की शोध की छात्रा नौशीन मंजूर हिन्दू धर्म के "नाग पंचमी" और "वट सावित्री" पर्व पर शोध कर रही है। नौशीन मंजूर मुस्लिम समुदाय से होते हुए भी हिन्दू समुदाय की विलुप्त होते पर्व एवम् लोक कथाओं पर रिसर्च कर रही है। नौशीन मंजूर ने बताया कि अलग समुदाय के होने से इस शोध में काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। घर वाले तो उनके इस शोध में उनके साथ दे रहे हैं लेकिन इस बेटी को पास पड़ोस के लोगों के ताने जरूर मिलते हैं। लेकिन इन तानों के बाद भी मुस्लिम बेटी समाज की जंजीरो को तोड़ अपने राह पर आगे बढ़ रही है।  

नौशीन ने NYOOOZ से बातचीत में बताया की जब उन्होंने हिन्दू पर्व पर शोध करने की सोची तो उन्हें समाज में अपने ही समुदाय के लोगों का विरोध और ताने सुनने पड़े। यही नहीं जब उसने अपने शोध को लेकर लोगों से चर्चा की तो पहले तो लोगो ने इसमें दिलचस्पी दिखाई। लेकिन जब मैंने अपना नाम बताया तो उन्होंने मदद करने से इंकार कर दिया। लेकिन लगातार अपने संघर्ष को जारी रखने के लिए इस बेटी ने अपनी मुहीम को नहीं छोड़ा।  

आपको बताते चलें की नौशीन शोध छात्रा के साथ-साथ एक बेहतरीन पेंटर भी है। नौशीन ने इलाहाबद यूनिवर्सिटी से कला विषय से मास्टर किया है और कला में टॉप किया है। नौशीन की मानें तो काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शोध करने के लिए उनको भारतीय संस्कृति का विषय दिया गया। इसमें उन्होंने हिन्दू परंपराओं और हिन्दू धर्म से विलुप्त होते पर्वो और लोक कथाओं विषय को चुना। नाग पंचमी और वट ‘सावित्री वृक्ष’ का व्रत उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र की परंपराए हैं। नौशीन ने बताया की यह परंपराए अब विलुप्ति की कगार पर है। चुंकी मैं पेंटिंग से जुड़ी हुई हुं तो लोगों के बीच जाकर विलुप्त होती परंपराओं और लोक कथाओं को चित्र के माध्यम से इकट्ठा करने की कोशिश कर रही हुं। अलग समाज की होने की वजह से हमे काफ़ी कठिनाई होती है। लेकिन जब किसी काम को किया जाता है तो इसमें कठिनाई आती ही है। नौशीन ने सामाजिक कुरूतियों के कारण सामुदायिक मतभेद किए जाने पर कहा कि जिस विषय पर मैं शोध कर रही हुं वह भारतीय संस्कृति का पर्व और मैं भारतीय हुं, इसका मुझे गर्व है। जो लोग इन सब विषय पर विरोध करते हैं वह गलत है। हम भारतीय हैं और हम अपनी पुरानी परंपराओं को संजो रहे हैं यह गलत नही है।

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