लंबे वक्त तक सांसद व विधायक रह चुके उमाकांत यादव की क्या है क्राइम हिस्ट्री, किन अपराधों के कारण हैं जेल में बंद

संक्षेप:

  • तीन बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं उमाकांत यादव।
  • धोखाधड़ी, लूट, हत्या, लोक संपत्ति को क्षति जैसे 36 मामले दर्ज।
  • इस समय जौनपुर जिला जेल में बंद हैं उमाकांत यादव।

वाराणसी. जौनपुर के खुटहन से लगातार तीन बार विधायक और मछलीशहर से एक बार सांसद रहे उमाकांत यादव के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं। उमाकांत यादव पर पहली बार 1977 में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद आजमगढ़, लखनऊ और जौनपुर में 36 आपराधिक मामले दर्ज हुए। आजमगढ़ जिले के दीदारगंज थाना क्षेत्र के सरावां गांव निवासी पूर्व सांसद उमाकांत यादव इस समय जौनपुर जिला जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ जौनपुर से तीन वारंट है। इनमें एक मामला लाइन बाजार और जीआरपी सिपाही हत्याकांड समेत दो शाहगंज कोतवाली के हैं। उनके खिलाफ धोखाधड़ी, लूट, हत्या, लोक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे अन्य कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं। उमाकांत यादव के भाई रमाकांत यादव भाजपा से सांसद रह चुके हैं। वह 2014 में मुलायम सिंह यादव के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़े थे और इस समय आजमगढ़ की फुलपुर पवई विधानसभा से विधायक हैं।

मायावती ने करवायी थी उमाकांत की गिरफ्तारी

उमाकांत यादव वर्ष 2004 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे केशरी नाथ त्रिपाठी को हराकर पहली बार सांसद बने थे। उमाकांत यादव जब मछलीशहर से बसपा से सांसद थे, तब मायावती प्रदेश की मुख्यमंत्री थी। साल 2007 में फरारी के दौरान उमाकांत यादव तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के बुलाने पर उनसे मिलने गए थे, तब मायावती ने तत्कालीन डीजीपी विक्रम सिंह को बुलाकर उन्हें गिरफ्तार कराया था।

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दीदारगंज में दर्ज हैं सबसे ज्यादा मुकदमें

वह 1991, 1993 में बसपा और 1996 में खुटहन से सपा के टिकट पर विधायक बने थे। 1996 में सपा के टिकट पर विधायक चुने जाने के बाद उमाकांत यादव पर महाराष्ट्र के सपा प्रदेश अध्यक्ष अबु हासिम आजमी के रिश्तेदार की जमीन कब्जा करने का भी आरोप लगा था। उनके खिलाफ आजमगढ़ जिले के दीदारनगर, फूलपुर, अहरौला, लखनऊ के हजरतगंज, जौनपुर के शाहगंज और लाइन बाजार थाने में आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए थे। सबसे ज्यादा मुकदमे दीदारगंज में दर्ज हुए थे। उमाकांत यादव पर फूलपुर, अहरौला, दीदारगंज में गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई हुई थी।

जीआरपी सिपाही हत्याकांड मामले में पाए गए आरोपी

आपको बता दें कि मछलीशहर से बसपा के पूर्व सांसद उमाकांत यादव समेत सात लोगों को अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय शरद कुमार तिवारी ने जीआरपी सिपाही हत्याकांड मामले में शनिवार को दोषी करार दिया था। यह घटना शाहगंज में 4 फरवरी 1995 को हुई थी। जीआरपी शाहगंज के तत्कालीन कांस्टेबल रघुनाथ सिंह ने घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिसके मुताबिक चार फरवरी 1995 को जीआरपी सिपाही रघुनाथ सिंह शाहगंज स्टेशन पर मौजूद था। इस दौरान प्लेटफार्म नंबर एक पर बेंच पर बैठने को लेकर पूर्व सांसद उमाकांत यादव के कार चालक राजकुमार यादव का एक यात्री से विवाद हो गया था। समझाने पर उसने जीआरपी सिपाही को थप्पड़ मार दिया। उसने अन्य सिपाहियों को बुलाया और झगड़ा करने वाले दोनों लोगों को जीआरपी चौकी ले आए। तहरीर के अनुसार दिन में लगभग ढाई बजे रायफल, पिस्टल और रिवाल्वर जैसे असलहों से लैस होकर आरोपी पूर्व सांसद उमाकांत यादव अपने छह नामजद साथियों व अन्य लोगों के साथ आए और पुलिस लॉकअप में बंद चालक राजकुमार यादव को जबरन छुड़ाने लगे। इस दौरान हुई अंधाधुंध फायरिंग में सिपाही अजय सिंह की मौत हो गई थी। दिनदहाड़े हुई इस वारदात से इलाके में दहशत हो गई थी।

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