सिटी स्टार - मेरठ के शिवम ठाकुर ने राइडिंग में जीते कई मेडल

  • Pinki
  • Sunday | 19th November, 2017
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संक्षेप:

  • नेशनल हॉर्सराइडर का पैशन है राईडिंग
  • नेशनल गेम्स में 18 गोल्ड मेडल कर चुके हैं अपने नाम
  • शिवम ठाकुर का ओलपिंयन बनना है सपना

मेरठ - मैदान में घुड़सवारी और हवा से बात करना.. कुछ ऐसे ही मेरठ के शिवम ठाकुर। शिवम ठाकुर ने जिस भी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया उसमें मेडल अपने नाम कर लिया। दरअसल, मेरठ के सरधना क्षेत्र के गांव सलावा के रहने वाले शिवम ठाकुर ने पैशन के तौर पर राइडिंग को लिया और आज राइडिंग इनकी जिंदगी बन चुका है। 2012 से लेकर अब तक शिवम नेशनल गेम्स में 18 गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुकी है। शिवम ठाकुर से की खास बातचीत के कुछ अंश..

सवाल - अपने बारे में कुछ बताए ? शिक्षा कहां से हासिल की ?

जवाब - बेसिकली में सरधना के सलावा का रहने वाला हूं... मेरे पिता जी श्री भूपेन्द्र सिंह बिजनेस मैन है और मम्मी श्रीमति गीता सोम.. वर्ल्र्ड की बेस्ट मॉम हैं। हम तीन भाई बहन हैं, बडी दीदी है छाया सोम...बड़े भईया विजय प्रताप सोम आर्मी के लिए हॉर्स राइडिंग करते हैं और मैं सबसे छोटा और सबसे शरारती हूं। शुरूआती शिक्षा सरधना से ही पूरी कि चूंकि मेरे बड़े भाई आर्मी में है और हॉर्स राईडिंग करते हैं उन्हें देखकर मुझे भी लगा कि मैं भी हवा से बात करूं। पापा और भाई ने साथ दिया और इस तरह से मैनें राईडिंग शुरू की।

सवाल - राईडिंग की शुरूआत कैसे हुई ? ये आपका पैशन कैसे बना ?

जवाब- जैसा कि मैंने बताया कि मेरे भाई हॉर्स राईडर हैं, उन्होंने मेरी प्रैक्टिस कराई। शुरूआती दौर में सही नहीं था लेकिन प्रेक्टिस के साथ मैनें खुद को सुधारा। ब्वायॅज स्पोर्ट कंपनी के लिए टेस्ट दिया और किस्मत से में उसमें सेलेक्ट हो गया। जिसके बाद मुझे एक रास्ता मिल गया और मैनें अपनी प्रैक्टिस को और टफ कर लिया क्योकि बस हमेशा मेरे दिमाग में एक ही धुन सवार रहती थी कि मुझे हवाओं से बात करनी है और सच मानिए जब आप राईडिंग करते हैं तो उस समय एक अलग ही अहसास होता है।

गेम्स में खुद को बेस्ट कहना तो सही नहीं होगा क्योंकि ये गेम्स हैं और गेम्स में आप जितनी प्रेक्टिस करोगे उतना ही आगे बढ़ोगे। 2012 में वो पल भी आया जब मैनें बैंगलोर में हुए गेम्स में हिस्सा लिया और इस गेम ने मेरी जिंदगी ही बदलकर रख दी क्योंकि पहली बार मैंने सोने का स्वाद चखा और इसके बाद तो बस हर इवेंट में गोल्ड की चाह रहती थी। इसके बाद मैनें स्पोर्टस कोटे से 2014 में आर्मी ज्वाइन कर ली।

सवाल - आर्मी ज्वाइन करने के बाद कैसा सफर रहा ? खेल के दौरान कभी चोटिल हुए ?

जवाब- इंडियन आर्मी इज बेस्ट, आज मैं आर्मी का हिस्सा हूं तो बहुत गर्व महसूस होता है। आर्मी ज्वाइन करने के बाद मुझे गेम्स से ओर ज्यादा लगाव हो गया। अनुशासन के साथ गेम्स खेलना मैनें शुरू कर दिया। अभी तक नेशनल्स गेम्स में 18 गोल्ड मेडल में अपने नाम कर चुका हूं। इसके साथ ही स्टेट लेवल कॉम्पीटिशनस में 12 गोल्ड मुझे मिलें है। अभी तो ये कुछ नहीं है मुझे ओलपिंक में देश का नाम रोशन करना है और उसके लिए मेरी प्रेक्टिस जारी है। देखिए ये गेम्स हैं यंहा चोट भी लगती है। फरवरी में राईडिंग के दौरान ही मेरे शोल्डर में इंजरी हो गई थी, जिसकी वजह से अभी मैं रेस्ट पर हूं। लेकिन राईडिंग की प्रेक्टिस में फिर भी करता हूं।

 

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