जब अमिताभ की आवाज बने कादर खान तब हिट हुए यह 10 डायलॉग

  • Pulkit
  • Tuesday | 1st January, 2019
  • entertainment
संक्षेप:

  • कादर खान ने 250 फिल्मों के डायलॉग लिखे हैं ।
  • फिल्म अंगार  के डायलॉग के लिए  फिल्मफेयर अवार्ड मिला था।
  • कादर खान ने करीब 300 फिल्मों में काम किया है।

कादर खान को एक्टर के तौर पर सब जानते हैं। लेकिन उनकी एक पहचान जो उनके अंदर के एक्टर से कहीं ज्यादा है। वह हैं उनके डायलॉग्स। एक वक्त था जब कादर खान ही अमिताभ बच्चन के लिए डायलॉग लिखा करते थे। हम बात कर रहें हैं। कादर खान के उन दस डायलॉग की जो एक समय में बेहद फेमस हुआ करते थे। 1983 में रिलीज हुई कुली में अमिताभ के किरदार में जान डालने वाले डायलॉग कादर खान ने ही लिखे थे, `बचपन से सर पर अल्लाह का हाथ और अल्लाहरख्खा है अपने साथ, बाजू पर 786 का है बिल्ला, 20 नंबर की बीड़ी पीता हूं और नाम है `इकबाल`

1978 आई मुकद्दर का सिकंदर में फकीर बाबा बने कादर खान जिंदगी का मर्म अमिताभ को समझाते हैं, `सुख तो बेवफा है आता है जाता है, दुख ही अपना साथी है, अपने साथ रहता है। दुख को अपना ले तब तकदीर तेरे कदमों में होगी और तू मुकद्दर का बादशाह होगा।`

हिम्मतवाला (1983) में अमजद खान के हंसोड़ मुंशी का किरदार निभाने वाले कादर को इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ कॉमेडियन का फिल्मफेयर मिला था। फिल्म में वो कहते हैं, `मालिक मुझे नहीं पता था कि बंदूक लगाए आप मेरे पीछे खड़े हैं। मुझे लगा कि कोई जानवर अपने सींग से मेरे पीछे खटबल्लू बना रहा है।`

मिस्टर नटवरलाल (1979) इसमें अमिताभ ने भगवान से बात करते हुए कहा था, `आप हैं किस मर्ज की दवा, घर में बैठे रहते हैं, ये शेर मारना मेरा काम है? कोई मवाली स्मग्लर हो तो मारूं मैं शेर क्यों मारूं, मैं तो खिसक रहा हूं और आपमें चमत्कार नहीं है तो आप भी खिसक लो`

अंगार (1992) के डायलॉग के लिए कादर खान को फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला था। इसका एक डायलॉग है। `ऐसे तोहफे (बंदूकें) देने वाला दोस्त नहीं होता है, तेरे बाप ने 40 साल मुंबई पर हुकूमत की है इन खिलौनों के बल पर नहीं, अपने दम पर`

सत्ते पे सत्ता (1982) में अमिताभ के शराब पीने वाले सीन को यूट्यूब पर काफी हिट मिले हैं। इसमें वो कहते हैं, `दारू पीता नहीं है अपुन, क्योंकि मालूम है दारू पीने से लीवर खराब हो जाता है, लीवर`

अग्निपथ (1990) में अमिताभ के किरदार को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला इसमें बड़ा हाथ जानदार संवादों का भी था, जो कादर खान ने ही लिखे थे, `विजय दीनानाथ चौहान, पूरा नाम, बाप का नाम दीनानाथ चौहान, मां का नाम सुहासिनी चौहान, गांव मांडवा, उम्र 36 साल 9 महीना 8 दिन और ये सोलहवां घंटा चालू है`

बाप नंबरी बेटा दस नंबरी (1990) में चालाक ठग का किरदार निभाने वाले कादर का एक मशहूर सीन, `तुम्हें बख्शीश कहां से दूं, मेरी गरीबी का तो ये हाल है कि किसी फकीर की अर्थी को कंधा दूं तो वो उसे अपनी इंसल्ट मान कर अर्थी से कूद जाता है`

हम (1991) में कादर खान का डबल रोल था और आर्मी कर्नल के किरदार में यह डायलॉग उन्होंने बोले थे, `कहते हैं किसी आदमी की सीरत अगर जाननी हो तो उसकी सूरत नहीं उसके पैरों की तरफ देखना चाहिए, उसके कपड़ों को नहीं उसके जूतों की तरफ देख लेना चाहिए`

फिल्म जुदाई 1997 में आई अनिल कपूर और श्रीदेवी अभिनीत इस फिल्म में परेश रावल सवाल पूछने वाले किरदार बने हैं लेकिन कादर खान उन्हें अपनी पहेलियों से छका देते हैं। `इतनी सी हल्दी, सारे घर में मल दी, बताओ किसकी सरकार बनेगी?`

 

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