एएमयू पहुंचा हिजाब प्रकरण, लगे अल्लाह हू अकबर के नारे

संक्षेप:

  • बुधवार को छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन कर नारेबाजी की। 
  • एएमयू में अल्लाह हू अकबर के लगे नारे।
  • 12 फरवरी को बड़े पैमाने पर विरोध मार्च निकालने का एलान।

अलीगढ़- कर्नाटक के उडुपी में एक कॉलेज में हिजाब पहनकर आई छात्रा मुस्कान को रोकने के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में अल्लाह हू अकबर के नारे लगे। बुधवार को छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन कर नारेबाजी की। साथ ही, 12 फरवरी को बड़े पैमाने पर विरोध मार्च निकालने का एलान किया है।

एएमयू के डक पॉंड पर बुधवार दोपहर 12 बजे से छात्र-छात्राएं एकत्र होने लगे। दोपहर तीन बजे तक छात्र-छात्राओं का हुजूम इकट्ठा हो गया। इस खबर पर प्रॉक्टोरियल टीम भी मौके पर पहुंच गई। इसी बीच छात्र-छात्राओं ने मार्च निकालना शुरू किया, लेकिन प्रॉक्टोरियल टीम ने बृहस्पतिवार को मतदान का हवाला देकर मार्च निकालने से मना कर दिया। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने खूब नारेबाजी की। अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए। इस दौरान छात्राओं का कहना था कि उडुपी के एक कॉलेज में हिजाब में आई छात्रा को रोका नहीं गया, बल्कि उसकी शब्दों से लिंचिंग भी की गई है। उन्होेंने कहा कि विरोध मार्च स्थगित कर दिया गया है, क्योंकि एएमयू इंतजामिया ने चुनाव का हवाला दिया है। 12 फरवरी की दोपहर 2 बजे से एएमयू में बड़े पैमाने पर विरोध मार्च निकाला जाएगा। छात्रों ने कहा कि छात्रा को रोकना गैर संवैधानिक है। यह भाजपा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शह पर हो रहा है, क्योंकि देश के पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, जहां भाजपा हारने वाली है। प्रॉक्टर प्रो. वसीम अली ने बताया कि हिजाब प्रकरण को लेकर यहां छात्र-छात्राएं विरोध मार्च निकाल रहे थे। 10 फरवरी को अलीगढ़ में मतदान होने के चलते मार्च निकालने से मना कर दिया गया। इससे कानून व्यवस्था पर असर पड़ सकता था।

छात्राएं बोलीं
हिजाब पहना मौलिक अधिकार है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की श्रेणी में आता है। व्यक्ति को निजता अधिकार के साथ धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार है।
- जैब जहां, छात्रा विधि, एएमयू
मसला हिजाब का नहीं है, बल्कि देश को बांटने की कोशिश जा रही है। अकेली छात्रा को ओछे शब्दों से अपमानित किया है, इससे देश की बदनामी हो रही है। हिजाब को लेकर जो सियासत की जा रही है, वह मुनासिब नहीं है।
- अफ्शां इलियास, छात्रा बीएड , जामिया उर्दू कॉलेज
शिक्षा के धर्म संप्रदाय या राजनीति को दूर रखा जाना चाहिए। सभी विद्यार्थियों के लिए स्कूल ड्रेस में आना अनिवार्य होना चाहिए। यदि किसी को धर्म विशेष के कपड़ों में आना है तो धार्मिक शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेना चाहिए न कि सामान्य शिक्षण संस्थानों मेें।

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- साक्षी, छात्रा बीए प्रथम वर्ष , टीकाराम कॉलेज
- हमारा भारत धर्म निरपेक्ष देश है। इसलिए भारत के प्रत्येक व्यक्ति को संविधान के नियमों का पालन करना चाहिए। विद्यार्थी का प्रथम कर्तव्य है कि कॉलेज के नियमों का पालन करे। यह सभी देशवासियों की जिम्मेदारी है।
- कंचन छात्रा, बीए फाइनल टीकाराम कॉलेज
हिजाब मुस्लिम औरत का जेवर है : शहर मुफ्ती
अलीगढ़। शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने कहा कि हिजाब मुस्लिम औरत का जेवर है। इसको इस्लाम के अलावा कोई नहीं जानता। अगर ड्रेस के ऊपर हिजाब पहनती हैं तो इसमें कोई हर्ज नहीं है। हिजाब को लेकर जो लोग विवाद पैदा कर रहे हैं, वह बिल्कुल ठीक नहीं है। इस्लाम में पर्दा फर्ज है। इसकी आलोचना करना बिल्कुल गलत है।
कर्नाटक में मौलिक अधिकारों का हनन : आरडीए
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के सचिव डॉ. मोहम्मद आदिल ने कर्नाटक के हिजाब प्रकरण को लेकर राष्ट्रपति को पत्र भेजा है।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक के स्कूलों में मुस्लिम छात्राओं को हिजाब को लेकर बदमाशों द्वारा तंग किया जा रहा है। हिजाब धार्मिक आस्था और संस्कृति का हिस्सा है। डॉ. आदिल ने कहा कि इन घटनाओं के समय को लेकर साजिश की बू आती है, क्योंकि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं और इसे सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस प्रकरण में उनसे हस्तक्षेप करने की गुजारिश की है।

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