यूक्रेन में युद्ध के दौरान फंसे है कई भारतीय विद्यार्थी, परिजनों को फोन पर बता रहे हालात

संक्षेप:

  • मेडिकल की पढ़ाई कर रहे कई छात्र यूक्रेन में फंसे।
  • परिजनों को फोन और वीडियो कॉल कर बता रहे स्थिति।
  • विद्यार्थियों का आरोप यूक्रेन में भारतीय दूतावास पर लटका है ताला।

अलीगढ़- रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध से यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी और उनके स्वजन काफी चिंतित हैं। यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों ने रुंधे गले से अपने परिजनों को बताया कि खाने का सामान और पीने का पानी खत्म हो रहा है। यह सुनकर उनकी आंखें भर आईं। कंपकंपाते लफ्जों से बच्चों को हिम्मत बंधाई।

कहा, सब ठीक हो जाएगा धैर्य रखो। कोई न कोई व्यवस्था जल्द होगी। बच्चे और परिजन एक-दूसरे के संपर्क में हैं। परिजनों का कहना है कि ईश्वर से बच्चों की सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं। विद्यार्थियों का आरोप है कि यूक्रेन में भारतीय दूतावास पर पहुंचे तो वहां पर ताला लटकने से काफी मायूसी हुई।

खतरे की आहट पर सो नहीं पाए : फाल्गुनी

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यूक्रेन के इवानो में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहीं फाल्गुनी धीरज ने पिता पंकज धीरज को बताया कि खाने का सामान और पीने का पानी खत्म हो रहा है। रात में खतरे की आहट से सो भी नहीं पाए। अब केवल सुरक्षित घर पहुंचने की चिंता है। दूसरे देश जाने और वहां से फ्लाइट लेने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं है।

युद्ध से गंभीर हालात पैदा हो गए हैं। मां काजल धीरज ने बताया कि यूनिवर्सिटी से बस निकलेगी, जिसके लिए बेटी फाल्गुनी व अन्य बच्चे पहुंचने वाले हैं, जो वाया बस यूक्रेन की सीमा से सटे किसी देश में पहुंचाने की बात सामने आ रही है।

बेटे सार्थक के लिए दोस्त रिषभ बना देवता : आमोद

यूक्रेन में एमबीबीएस के छात्र सार्थक उपाध्याय के पिता आमोद उपाध्याय ने बताया कि वीडियो व वॉयस कॉलिंग से बेटे से बातचीत हो रही है। सार्थक के लिए उसका दोस्त रिषभ कौशिक देवता बन गया। स्वर्णजयंती नगर निवासी आमोद उपाध्याय ने बताया कि बेटे की फ्लाइट 24 फरवरी की शाम चार बजे एयर अरबिया एयरलाइंस से थी।

सुबह सात बजे खारकीव से एयरपोर्ट के लिए बेटा बस से रवाना हो गया। फ्लाइट 25 फरवरी को सुबह सवा तीन बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचनी थी। 8:15 बजे वह बेटे के संपर्क में थे। बेटे का सुबह 11:15 बजे फोन आता है कि पापा, बस चल रही है, इसलिए सो जाता हूं। इसके बाद फोन आता है कि फ्लाइट निरस्त हो गई है।

पूछा तो, जवाब दिया कि पता नहीं। बस कहां जा रही है तो कहा, कीव की तरफ। बस ने कीव की सड़क पर बेटे को उतार दिया। सभी बच्चे दूतावास गए, लेकिन वहां ताला लटक रहा था। आमोद उपाध्याय ने कहा कि यह बिल्कुल ठीक नहीं था। बेटा इधर-उधर घूमता रहा।

वह वहां परेशान था और हमसब यहां परेशान थे। इसी बीच एक दोस्त का बेटे के पास फोन आया कि कीव न आना, क्योंकि यहां के हालात ठीक नहीं है। बेटे ने कहा, वह तो कीव में हैं। फिर दोस्त रिषभ कौशिक उसके पास आया और उसे अपने साथ हॉस्टल ले गया, जहां वह सकुशल हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत सरकार सक्त्रिस्य हो जाती तो बच्चे सभी सकुशल वापस आ जाते।

बेटे से बातचीत में आ रही थीं धमाकों के आवाज : डॉ. सिंह

यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे अमित कुमार के पिता डॉ. मानवीर सिंह भी अपने बेटे के साथ अन्य विद्यार्थियों को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि बेटे अमित से सुबह बात हुई तो उसने कहा, खारकीव में मेट्रो के भूमिगत जगह पर बिठा रखा गया है। पानी की समस्या भी हो गई। बातचीत में मिसाइल के गिरने की आवाजें आ रही थीं।

25 फरवरी को उसकी उड़ान थी, लेकिन ऐनवक्त पर उड़ान निरस्त कर दी गई। खारकीव के एयरबेस पर धमाका हो गया। डॉ. मानवीर सिंह ने कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच 15 दिन से तनाव था तो उसी वक्त निर्णय लिया होता तो यह स्थिति आज देखने को नहीं मिलती। तीन दिन पहले तक कक्षाएं चलती रहीं। अगर कक्षा ऑनलाइन होती तो बच्चे घर आ जाते। ऑनलाइन कक्षा के लिए भारत सरकार एडवाइजरी जारी कर सकती थी। उन्होंने कहा कि आठ दिन पहले यूक्रेन बच्चे गए थे, अगर तनाव था तो भारत सरकार ने बच्चों को क्यों जाने दिया।

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