इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज की अभियोजन याचिका, पूर्व गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद के खिलाफ दुष्कर्म केस वापसी पर फैसला रखा सुरक्षित

संक्षेप:

  • पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के लिए यूपी सरकार ने डाली अभियोजन याचिका।
  • दुष्कर्म का मुकदमा वापस लेने का है मामला।
  • इलाहाबाद हाई कार्ट ने फैसला रखा सुरक्षित।

प्रयागराज. पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री चिन्मयानंद स्वामी के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा वापस लेने के मामले में फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुरक्षित कर लिया। युवती ने स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ शाहजहांपुर में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने स्वामी चिन्मयानंद के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया।

यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने याची स्वामी चिन्मयानंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार, सरकारी वकील को सुनने के बाद शुक्रवार को दिया। राज्य सरकार ने अभियोजन वापसी की अर्जी दी थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।

राज्य सरकार ने कोर्ट को दी अभियोजन वापसी की अर्जी

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मामले के अनुसार, राज्य सरकार ने अभियोजन वापसी की दरख्वास्त दी थी, जिसे निचली अदालत शाहजहांपुर ने खारिज कर दिया था। पीड़ित युवती ने स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ शाहजहांपुर में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने विवेचना के बाद स्वामी चिन्मयानंद के विरुद्ध इसी अपराध में आरोप पत्र दाखिल किया। हाईकोर्ट से स्वामी चिन्मयानंद को गिरफ्तारी पर स्थगनादेश मिल गया। बाद में सरकार ने स्वामी चिन्मयानंद के विरुद्ध इस आपराधिक मामले में अभियोजन वापसी की दरख्वास्त दी, जो खारिज हो गई।

सरकार विधायकों व सांसदों के विरुद्ध वापस ले रही आपराधिक मामले- एडवोकेट शुक्ल

पीड़िता के पति के अधिवक्ता संदीप शुक्ल ने कहा कि पीड़िता ने मुकदमे में बाद में स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के पक्ष में जवाबी हलफनामा दाखिल किया। पीड़िता ने मुकदमे में अपने पति के खिलाफ भी कई आरोप लगाए थे। एडवोकेट शुक्ल ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट से एक जनहित याचिका में सांसदों व विधायकों के खिलाफ लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण की मांग की गई है। उसमें बिंदु उठाया गया कि विभिन्न सरकारें राजनीतिक फायदे के लिए तमाम विधायकों एवं सांसदों के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों को सीआरपीसी की धारा 321 की शक्तियों का उपयोग करते हुए वापस ले रही हैं।

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