दुष्कर्म के आरोपी को बताया नाबालिग, अभिभावक और प्रधानाचार्य पर एफआईआर का आदेश

संक्षेप:

  • फर्जी दस्तावेज लगा आरोपी को बना दिया नाबालिग।
  • विद्यालय के प्रधानाचार्य के खिलाफ एफआईआर का आदेश।
  • सिंडीकेट के काम करने की भी आशंका।

प्रयागराज- खुल्दाबाद स्थित किशोर न्याय बोर्ड के सामने फर्जी दस्तावेजों के सहारे दुष्कर्म के एक आरोपी को नाबालिग बनाने का मामला सामने आया है। आरोपी के अभिभावक के साथ फर्जी प्रवेश रजिस्टर प्रस्तुत करने वाले विद्यालय के प्रधानाचार्य के खिलाफ एफआईआर लिखकर आगे की कार्रवाई का आदेश दिया गया है। साथ में बीएसए को भी विद्यालय के खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है। बोर्ड ने आरोपी को बालिग घोषित करते हुए उसके मुकदमों को संबंधित न्यायालय में भेज दिया। दुष्कर्म के आरोपी को नाबालिग घोषित किए जाने के लिए अभिभावक की ओर से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे।

समर्थन में घूरपुर स्थित सरस्वती ज्ञान मंदिर जूनियर हाईस्कूल की ओर से जारी प्रवेश रजिस्टर की फोटो कॉपी लगाई गई थी। इस मामले में विद्यालय के प्रधानाचार्य अवधेश कुमार अवस्थी भी रजिस्टर के साथ बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत हुए और बयान दर्ज कराए, लेकिन मुकदमा लिखाने वाले पक्ष ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई। साथ ही एक दूसरे विद्यालय से प्राप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए। इसके बाद दूसरे विद्यालय के प्रधानाचार्य को भी बुलाया गया। दूसरे विद्यालय के प्रधानाचार्य की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अवधेश से दोबारा पूछताछ की गई, लेकिन वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

ऐसे में बोर्ड के सदस्यों की ओर से जारी निर्देश में कहा गया कि सरस्वती ज्ञान मंदिर जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाचार्य की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज झूठे और गलत प्रतीत होते हैं। विधि सह परिवीक्षा अधिकारी विवेक कुमार द्विवेदी ने बताया कि  किशोर न्याय बोर्ड ने आरोपी के अभिभावक तथा प्रधानाचार्य के खिलाफ संबंधित थानों में मुकदमा लिखाकर आगे की जांच का आदेश दिया है। उन्होंने बताया कि बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट शिवार्थ खरे एवं सदस्य नरेंद्र कुमार साहू, शीला यादव ने आरोपी को बालिग घोषित करते हुए उसके मुकदमों को संबंधित न्यायालय में भेज दिया।

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सिंडीकेट के काम करने की भी आशंका
किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट शिवार्थ खरे ने आदेश के क्रम में कहा कि ‘प्रतीत होता है कि जिले में ऐसा सिंडिकेट कार्य कर रहा है जो कुछ
पैसों के लालच में वयस्क अपराधियाें का किशोर प्रमाण पत्र तैयार करने का टेंडर लेता है तथा न्यायालय-बोर्ड में मिथ्या साक्ष्य गढ़कर प्रस्तुत करता
है। ताकि, आरोपी को जमानत मिल सके। साथ ही वे कठोर सजा से बच सकें।’

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