Swatantrata Ke Sarthi: चिरौड़ी की चिरौरी, माटी कला में आगे बढ़ी संगम नगरी; बनाई नई पहचान

इसे भी पढ़ें-प्रयागराज से 148 अतिरिक्त ट्रिप लगाएंगी बसें, बहनें करेंगी फ्री यात्रा मेहनत ला रही रंग कलाकारों ने बताया कि नवाचार के चलते मेहनत रंग लाने लगी है।

जिला प्रशासन ने बढ़िया आकार की मूर्तियां बनाने की उनकी क्षमता को स्वीकार करने और बाद में उन्हें प्रशिक्षण दिलाया, जिसके बाद युवाओं के पास अब इलेक्ट्रानिक चाक आ गए हैं, जिससे तेजी से बर्तन और खिलौने बनते हैं।

युवाओं को प्रशिक्षण भी मिला है। यहां 57 परिवारों में लगभग 280 लोग दीपावली पर्व पर विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ दियाली बनाकर तैयार करते हैं।

इंद्रपाल प्रजापति, दिलीप प्रजापति, मधु प्रजापति, मान सिंह, अजीत, गेंदा देवी, अमरावती, आशीष प्रजापति ने बताया कि रात दिन मेहनत करके 6000 गणेश-लक्ष्मी, हनुमान, कुबेर आदि की मूर्तियां तैयार कर ली है।

इसके अलावा लगभग 5000 दियाली भी दीपोत्सव के लिए बनाई है।

दीपावली तक पूरे गांव में डेढ़ लाख के करीब मूर्तियां व 10 लाख दियाली बना ली जाएगी। ।

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