अपराध की गंभीरता नाबालिग को जमानत से इन्कार का आधार नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि याची को जमानत पर रिहा करने से शाहजहांपुर की विशेष अदालत द्वारा इन्कार के आदेश में इन तीनों को आधार नहीं बनाया गया है।

सह अभियुक्तों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

इसलिए याची भी जमानत पाने का हकदार है।

यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका मंजूर करते हुए दिया है। इसे भी पढ़ें-बस्‍ती अपहरण कांड के 22 साल पुराने मामले में आया नया मोड़, राहुल ने कहा- मेरे किडनैपिंग में अमरमणि की कोई भूमिका नहीं कोर्ट ने अपर सत्र अदालत विशेष अदालत (पाक्सो) के 18 जनवरी 2024 और 28 फरवरी 2024 की प्रमुख मजिस्ट्रेट, किशोर न्याय बोर्ड की रिपोर्ट को रद कर दिया है।

याची नाबालिग को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है।

याची व कई अन्य के खिलाफ शाहजहांपुर के तिलहर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 364, 302 और 34 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई है। विशेष बाल अदालत द्वारा जमानत देने से इन्कार किए जाने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

याची के अधिवक्ता का कहना था कि उसकी (याची की) आयु घटना के समय 16 वर्ष छह माह थी।

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