- होम >>
कृष्ण जन्मभूमि मामला: मस्जिद पक्ष ने रखी लंबी दलील, मंदिर पक्ष ने दिया जवाब- इस तरह जमीन का चरित्र…
- न्यूज़
- Monday | 27th May, 2024
कहा, पक्षकारों ने 12 अक्टूबर 1968 को समझौता किया था और 1974 में तय सिविल मुकदमे में इसकी (समझौते की) पुष्टि की गई है।
इसे चुनौती देने की सीमा तीन साल है लेकिन मुकदमा 2020 में किया गया है। मंदिर पक्ष ने पूर्व में कहा था कि समझौते में देवता कोई पक्ष नहीं थे और न ही 1974 में पारित अदालती डिक्री में कोई पक्ष था।
कथित समझौता श्री जन्म सेवा संस्थान ने किया था, जिसे किसी भी समझौते को करने का अधिकार नहीं था।
संस्थान का उद्देश्य केवल रोजमर्रा की गतिविधियों का प्रबंधन था।
देवता नाबालिग हैं और नाबालिग के हित के खिलाफ किया गया कोई भी समझौता सही नहीं है। मंदिर पक्ष से राणा प्रताप के साथ रीना एन सिंह का कहना था कि किसी भी संपत्ति पर अतिक्रमण करना, उसकी प्रकृति बदलना और उसे बिना स्वामित्व वक्फ संपत्ति के रूप में परिवर्तित करना वक्फ की प्रकृति रही है।
इसे अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रकरण में वक्फ अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होंगे क्योंकि विवादित संपत्ति वक्फ संपत्ति नहीं है।
जिस संपत्ति की बात है वह मंदिर था और जबरन कब्जा करने के बाद नमाज अदा करना शुरू कर दिया गया, लेकिन इस तरह जमीन का चरित्र नहीं बदला जा सकता। ।
If You Like This Story, Support NYOOOZ
Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.
Read more Allahabad की अन्य ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें और अन्य राज्यों या अपने शहरों की सभी ख़बरें हिन्दी में पढ़ने के लिए NYOOOZ Hindi को सब्सक्राइब करें।






डिसक्लेमर :ऊपर व्यक्त विचार इंडिपेंडेंट NEWS कंट्रीब्यूटर के अपने हैं,
अगर आप का इस से कोई भी मतभेद हो तो निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिखे।