पटरियों के किनारे दुकान लगाने वाले मांग रहे BMW-ऑडी कार, दहेज की झूठी शिकायतों पर HC ने जताई नाराजगी

आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए खंडपीठ ने की टिप्पणी न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी तथा न्यायमूर्ति मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की खंडपीठ ने साजिद की आपराधिक अपील को स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की।

शिकायतकर्ता शहजाद अली की अपील कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

हापुड़ के सत्र न्यायाधीश/एफटीसी ने साजिद को घरेलू हिंसा, दहेज हत्या के प्रयास सहित दहेज उत्पीड़न का दोषी पाते हुए दस वष की सजा सुनाई थी। शिकायतकर्ता शहजाद अली की शिकायत को सही नहीं मानते हुए दहेज उत्पीड़न के आरोपित साजिद के पिता नजाकत अली, मां जैतून और भाई जाकिर को बरी कर दिया था।

शहजाद ने इन तीनों को बरी किए जाने को और साजिद ने अपनी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि शिकायत कर्ता शहजाद अली परिवार का एकमात्र कमाने वाला व्यक्ति है, जो यह मानता है कि उसकी मासिक आमदनी 18 हजार रुपये से 20 हजार रुपये ही है।

इन स्थितियों में वह अपनी बेटी के नाम प्लाट पर प्लाट खरीद रहा है, जो अकल्पनीय है, जो कि इस मासिक आय के स्रोत से नहीं खरीदा जा सकता है। कोर्ट ने शहजाद अली की अपील में पाया कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों नजाकत, जैतून और जाकिर को बरी कर सही किया है।

कोर्ट ने शहजाद की अपील पर ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने साजिद की अपील में ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही नहीं माना और कहा कि साजिद के खिलाफ दिया गया फैसला एकतरफा और गलत है।

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