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`प्राइमरी शिक्षक नहीं पा सकते वेतन सुरक्षा...`, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्यों कही ये बात
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- Sunday | 16th June, 2024
इसे भी पढ़ें-गोरखपुर में हैवानियत की सभी हदें पार, दुष्कर्म के बाद महिला को जिंदा जलाने का प्रयास, मचा हड़कंप याची अध्यापकों की याचिका पर एकलपीठ ने उनकी मांग स्वीकार कर वो राहत भी प्रदान करने का आदेश दिया, जिसे वे नहीं पा सकते थे।
इसे बेसिक शिक्षा अधिकारी ने विशेष अपील में चुनौती दी।
खंडपीठ ने याचिका को सुनवाई के लिए पांच सप्ताह बाद एकलपीठ के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है। बेसिक शिक्षा परिषद के अधिवक्ता रामानंद पांडेय का तर्क था कि जिस अभय कुमार पाठक केस में आदेश का सहारा लेकर एकलपीठ ने प्रोन्नति व चयन वेतनमान देने का आदेश दिया है, उस आदेश में भी कोर्ट ने ऐसी राहत नहीं दी है।
याचियों ने स्वयं ही अपनी पसंद के जिले मऊ में यह कहते हुए स्थानांतरण लिया था कि वे पदोन्नति नहीं लेंगे और सहायक अध्यापक के पद पर काम करेंगे। इसे भी पढ़ें-मां ने निभाया पिता का दायित्व, बेटे के हौसले को दी उड़ान, बनाया अफसर अंतरजनपदीय तबादला नीति की यह शर्त भी है।
एकलपीठ ने विपिन कुमार केस के आदेश पर विचार नहीं किया।
खंडपीठ ने कहा, यह मांग विबंध न्याय के सिद्धांत के विपरीत है।
विपिन कुमार केस में वेतन संरक्षण का आदेश इस मामले में लागू नहीं होगा। याची विपक्षियों ने स्वेच्छा से पदोन्नति और चयन वेतनमान छोड़ने का फैसला लेकर तबादला स्वीकार किया है।
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