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`शाही` पर संतों का सवाल: महाकुंभ में उर्दू-फारसी शब्दों के विरोध में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद; PM-CM से भी करेंगे अपील
- न्यूज़
- Thursday | 5th September, 2024
हमारी परंपरा को नष्ट करना चाहते थे मुगल वासुदेवानंद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती कहते हैं कि मुगलों ने सनातन धर्म की संस्कृति व परंपरा को नष्ट करने का हर संभव प्रयत्न किया था।
वह हर चीज का इस्लामीकरण करना चाहते थे।
हमारी परंपराओं में उसी कारण उर्दू शब्द का प्रयोग होने लगा।
अब उसे बदलने की जरूरत है।
यह धर्म व राष्ट्रहित में है। उर्दू शब्द को बदलने की जरूरत जीतेंद्रानंद अखिल भारतीय संत समिति व गंगा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती कहते हैं, अखाड़ों के महात्माओं ने मुगलों से लड़कर सनातन धर्म व उसके धर्मावलंबियों की रक्षा की।
उस दौर में उर्दू राजभाषा थी।
अंग्रेजों के समय तक उर्दू का प्रयोग होता था। अखाड़ों की परंपरा में उर्दू शब्द का प्रयोग होने लगा।
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