बारिश के मौसम में वरदान साबित होगा 50 वर्ष पुराना जलस्रोत, अमृत सरोवर योजना से किया गया कायाकल्प

तालाब के पुनर्जीवित करने में लगा इतना समय तालाब के पुनर्जीवन के कार्य में महज महीने भर का समय लगा।

सबसे पहले इसके प्रदूषित पानी को निष्कासित (डिवाटरिंग) किया गया।

इसके बाद नीचे जमी गाद को आस-पास के किसान ले गए जिससे तालाब की सतह साफ और गहरी हो गई।

गांव के उत्सर्जित पानी को स्वच्छ करने डिवाट्स तकनीक बनाई गई है, जो तीन चरणों में पानी को बिना किसी रसायन के स्वच्छ कर तालाब के पहले लगून तक पहुंचाएगी। तालाब के आस-पास पौधारोपण करने की भी है योजना  तीनों लगून का पानी मुख्य तालाब से नहीं मिलेगा जिससे जिससे मुख्य जलस्रोत पूर्णता स्वच्छ रहेगा एवं मछली पालन, सिंघाड़ा उत्पादन आदि के लिए उपयुक्त रहेगा।

हरियाली बढ़ाने तालाब के आस-पास पौधारोपण करने तथा पार्क बनाने की भी योजना है।

तालाब के पुनर्जीवन के लिए लोहा, सीमेंट आदि का प्रयोग नहीं किया गया।

यहां तक कि तालाब की स्टोन पिचिंग भी नहीं की गई। तीन चरणों में तीन चैंबर करेंगे पानी साफ तालाब के निकट बन रहे डीवाट्स स्ट्रक्चर से तीन चरणों में तालाब में मिलने वाली नालियों का पानी साफ होकर तालाब में मिलेगा।

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