भोपाल: अशुद्ध जल भी बनेगा ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का माध्यम, विज्ञानियों ने किया शोध

अब यह कदम जरूरी डा. चाकमा ने बताया कि सरकार और उद्योगों को इस तकनीक को अपनाने और बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने चाहिए।अनुसंधान और विकास में निवेश करके इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है।

आम जनता को भी स्वच्छ ऊर्जा के महत्व को समझना और उसका समर्थन करना चाहिए। अशुद्ध जल का सदुपयोग यह तकनीक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अशुद्ध जल में मौजूद यूरिया का उपयोग करती है।

यूरिया का उपयोग कृषि के लिए व्यापक रूप से किया जाता है और यह कई उद्योगों द्वारा भी उपयोग किया जाता है।इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होगा ,बल्कि जल प्रदूषण की समस्या को भी कम किया जा सकेगा।अशुद्ध जल का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है और इस तकनीक से उसका समाधान संभव है।

यह ऊर्जा का सस्ता स्रोत भी है। आम जनता के लिए फायदे जल संरक्षण: स्वच्छ पानी की आवश्यकता को कम करके यह तकनीक पानी बचाने में सहायक है, जो जलसंकट से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो सकती है। सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा: यूरिया के उपयोग से हाइड्रोजन उत्पादन सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल है, जिससे आम जनता को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त हो सकती है। अशुद्ध जल का उपयोग: यूरिया मुख्यतः अपशिष्ट जल में पाया जाता है, जिससे यह तकनीक न केवल जल का सदुपयोग करती है, बल्कि प्रदूषण भी कम करती है। स्थिरता और दीर्घकालिक समाधान: यह विधि सतत ऊर्जा स्रोतों के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा सुनिश्चित करेगी। यह शोध बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन उत्पादन के लिए नए रास्ते खोलती है।

जल संकट के इस दौर में स्वच्छ पानी पर निर्भरता कम करने और अशुद्ध जल का सदुपयोग करने की इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाना चाहिए।

इसके जरिए न केवल स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन संभव होगा, बल्कि जल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। डा. शंकर चाकमा, विभागाध्यक्ष, रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग,आइसर नवीनीकरण व स्थायी ऊर्जा, बायो फ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन और सोलर एनर्जी को लेकर एक सेंटर खोलने की योजना है।

इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

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