बंदूक नहीं अब किताब और लाइब्रेरी से बस्तर के `बचपन` में फैला ज्ञान का प्रकाश; माओवाद के काले साये से मिलेगी आजादी

आदिवासी बहुल कोसागांव के बालक आश्रम के भीतर पुस्तकालय में घुसते ही यह आभास नहीं होता कि यह बस्तर का कोई सरकारी बालक आश्रम है।

सैकड़ों पुस्तकें, आधुनिक साज-सज्जा युक्त स्मार्ट कक्षा ओर डिजिटल पुस्तकालय किसी बड़े शहर के निजी स्कूल सा लगता है। अब पढ़ाई रूचिकर लगती हैपुस्तकों के इस संसार में खोए आदिवासी बालक प्रवीण नाग और अंकुल नेताम कहते हैं कि इस पुस्तकालय के खुलने से उन्हें पढ़ाई अब रूचिकर लगती है।

यहां आकर पुस्तकों की दुनिया में खो जाना अच्छा लगता है।

बहुत कुछ नया सीखने और इस संसार के बारे में जानने को मिल रहा है। 124 आश्रमों में बनेंगे पुस्तकालयजिले के पूर्व कलेक्टर कलेक्टर कुणाल दुदावत कहते हैं कि यह पुस्तकालय छात्रों में शिक्षा के प्रति जिज्ञासा पैदा करता है।

पारंपरिक और डिजिटल संसाधनों के उपयोग से छात्रावासों के कक्षों को किताबें पढ़ने में तल्लीन बच्चों के सीखने के केंद्रों में बदला गया है।

जिले के 124 आश्रमों को कल्पना कक्ष पुस्तकालय के लिए चयनित किया गया है। कलेक्टर के नवाचार ने बदली बच्चों की दुनियाआदिवासी आश्रम शालाओं में स्मार्ट पुस्तकालय का यह नवाचार 2017 बैच के आइएएस कुणाल दुदावत की देन हैं, जिससे आदिवासी बच्चों की दुनिया बदल चुकी है।

राजस्थान के सवाई माधोपुर के रहने वाले कुणाल को दो दिन पहले ही दंतेवाड़ा जिले का कलेक्टर बनाया गया है।

If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

डिसक्लेमर :ऊपर व्यक्त विचार इंडिपेंडेंट NEWS कंट्रीब्यूटर के अपने हैं,
अगर आप का इस से कोई भी मतभेद हो तो निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिखे।

अन्य बिलासपुर की अन्य ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें और अन्य राज्यों या अपने शहरों की सभी ख़बरें हिन्दी में पढ़ने के लिए NYOOOZ Hindi को सब्सक्राइब करें।