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बंदूक नहीं अब किताब और लाइब्रेरी से बस्तर के `बचपन` में फैला ज्ञान का प्रकाश; माओवाद के काले साये से मिलेगी आजादी
- न्यूज़
- Tuesday | 22nd April, 2025
आदिवासी बहुल कोसागांव के बालक आश्रम के भीतर पुस्तकालय में घुसते ही यह आभास नहीं होता कि यह बस्तर का कोई सरकारी बालक आश्रम है।
सैकड़ों पुस्तकें, आधुनिक साज-सज्जा युक्त स्मार्ट कक्षा ओर डिजिटल पुस्तकालय किसी बड़े शहर के निजी स्कूल सा लगता है। अब पढ़ाई रूचिकर लगती हैपुस्तकों के इस संसार में खोए आदिवासी बालक प्रवीण नाग और अंकुल नेताम कहते हैं कि इस पुस्तकालय के खुलने से उन्हें पढ़ाई अब रूचिकर लगती है।
यहां आकर पुस्तकों की दुनिया में खो जाना अच्छा लगता है।
बहुत कुछ नया सीखने और इस संसार के बारे में जानने को मिल रहा है। 124 आश्रमों में बनेंगे पुस्तकालयजिले के पूर्व कलेक्टर कलेक्टर कुणाल दुदावत कहते हैं कि यह पुस्तकालय छात्रों में शिक्षा के प्रति जिज्ञासा पैदा करता है।
पारंपरिक और डिजिटल संसाधनों के उपयोग से छात्रावासों के कक्षों को किताबें पढ़ने में तल्लीन बच्चों के सीखने के केंद्रों में बदला गया है।
जिले के 124 आश्रमों को कल्पना कक्ष पुस्तकालय के लिए चयनित किया गया है। कलेक्टर के नवाचार ने बदली बच्चों की दुनियाआदिवासी आश्रम शालाओं में स्मार्ट पुस्तकालय का यह नवाचार 2017 बैच के आइएएस कुणाल दुदावत की देन हैं, जिससे आदिवासी बच्चों की दुनिया बदल चुकी है।
राजस्थान के सवाई माधोपुर के रहने वाले कुणाल को दो दिन पहले ही दंतेवाड़ा जिले का कलेक्टर बनाया गया है।
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