यमुना एक्सप्रेस-वे पर नहीं रूक रहा हादसों का सिलसिला, सुरक्षा के इंतेजाम में खर्च किए गए हैं 130 करोड़ रुपये

संक्षेप:

  • यमुना एक्सप्रेस-वे पर नहीं रूक रहा हादसों का सिलसिला।
  • हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस।
  • सुरक्षा के इंतेजाम में खर्च किए गए हैं 130 करोड़ रुपये।

गाजियाबाद. यमुना एक्सप्रेस-वे पर हादसे रोकने और सुरक्षा के लिए 130 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद दुघर्टनाओं पर रोक नहीं लग पा रही है। गोरखपुर से लुधियाना जा रही डबल डेकर बस दो घंटे तक हादसे का शिकार होकर यमुना एक्सप्रेस-वे से पांच फुट नीचे टेड़ी होकर अटकी रही। इस दौरान बस में सवार 70 यात्रियों की सांसें भी अटकी रहीं। घायल व अन्य यात्री मदद की गुहार लगाते हुए ईश्वर से प्रार्थना करते रहे। वहीं, पुलिस व एक्सप्रेस-वे के कर्मचारी यात्रियों को बाहर निकालने के प्रयास जुटने के साथ ही उन्हें ढांढस बंधाते रहे।

हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

रबपुरा के एसएसआई राजकुमार चौहान ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही थाना पुलिस मौके पर पहुंचकर यात्रियों को बस से बाहर निकालने के प्रयास में जुट गई थी। लेकिन बस यमुना एक्सप्रेस-वे से पांच फुट नीचे अटकी थी। वहीं, बस के गेट आदि नहीं खुल पा रहे थे। इसके चलते एक्सप्रेस-वे कर्मियों आदि की मदद से गैस कटर का इंतजाम किया गया। इसके बाद जहां जरूरी था। वहीं, से बस के हिस्से का काटा गया या फिर खिड़की का शीशा तोड़ा गया। इस काम में यह भी ख्याल रखा गया कि किसी यात्री को चोट आदि न लगे। यात्रियों को बाहर निकालने में लगभग दो घंटे का समय लगा। लेकिन बस को उपर लाने में कई घंटे लगे। हादसे में जान गंवाने वाले सेना के जवान के साथ उसका एक साथी और मौजूद था। उसने बताया कि लवी कुमार अयोध्या से प्रशिक्षण आदि कर लौट रहा था।

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130.54 करोड़ खर्च कर किए सुरक्षा के ये 22 काम

यमुना एक्सप्रेस-वे पर लगातार बढ़ते हादसों के बाद आईआईटी दिल्ली के द्वारा हादसों की वजह जानने के लिए ऑडिट कराया गया था। जिसके बाद आईआईटी दिल्ली ने रोड सेफ्टी ऑडिट सुझाव के तहत एक्सप्रेस- वे पर दोनों तरफ स्टील की ग्रिल लगाकर डिवाइडर बनाने, सभी अंडरपासों पर क्रश बीम लगाने, मोड़ों पर रिफ्लेक्टर लगाने के अलावा स्ट्रिप ब्रेकर सहित रोड सेफ्टी ऑडिट के तहत कुल 22 कार्य कराने का सुझाव दिया था। जिसको कंशैसनायर द्वारा 130.54 करोड़ की लागत से पूरा करा दिया गया है। लेकिन यमुना एक्सप्रेस-वे पर अभी हादसों का सिलसिला नहीं थमा।

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