पधारो म्हारो राजस्थान पर धब्बा! रेप स्टेट बनता जा रहा है राजस्थान, 5 महीने में 12 गैंगरेप और 20 बलात्कार

संक्षेप:

  • राजस्थान में पिछले 5 महीने में 12 गैंगरेप और 20 बलात्कार की घटनाएं हुई हैं.
  • 8 मासूम बच्चियों से रेप किया गया.
  • जिनमें से 2 से रेप के बाद उनकी हत्याएं कर दी गई.

अलवर: अलवर गैंगरेप केस के बाद प्रदेश में महिलाओं पर अत्याचार और पुलिस प्रशासन की गंभीर लापरवाही के कई मामले सामने आए हैं. भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस संदर्भ में प्रदेश में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार के दौरान महिलाओं पर हुए अत्याचारों की एक विस्तृत सूची राज्यपाल कल्याण सिंह तक पहुंचाई गई है. इसमें 10 मई तक प्रदेश में ऐसे 46 अपराधों की जानकारी है, जिनमें महिलाओं से गैंगरेप, युवतियों से बलात्कार और मासूम बच्चियों से रेप और रेप के बाद हत्याओं जैसी बेहद शर्मनाक घटनाएं शामिल हैं. पिछले 5 महीने में 12 गैंगरेप और 20 बलात्कार की घटनाएं हुई हैं. 8 मासूम बच्चियों से रेप किया गया, जिनमें से 2 से रेप के बाद उनकी हत्याएं कर दी गई.

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में महिलाओं के खिलाफ हाल ही हुए अत्याचारों की पूरी लिस्ट दी गई. इसमें 12 गैंगरेप केस थे. 20 रेप और रेप के बाद 2 हत्याएं, 1 एसिड अटैक और 10 मर्डर की वारदातें शामिल हैं.

राजस्थान में 12 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप की सजा फांसी का कानून है और इस लिस्ट में ऐसी एक दर्जन से अधिक वारदातें हुई हैं.

ये भी पढ़े : रेप मामले में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर से पूछताछ, आरोपी बॉडीगार्ड है लापता


सूची में पहली वारदात अलवर के कठूमर अस्पताल में महिला से एंबुलेंस ड्राइवर और कम्पाउंडर के गैंगरेप की है.

दूसरी वारदात, अजमेर घुमने गई जयपुर की युवती से रेप की है.

तीसरे वारदात, बाड़मेर में लड़की को अगवा कर रेप किया गया.

चौथी घटना, सीकर में चार युवकों ने घर में घुसकर गैंगरेप किया.

पांचवी वारदात, जोधपुर के तिवरी में मां-बेटी को कार से कुचल कर मार डाला गया.

बीकानेर, नोखा में में चार दिन तक महिला से गैंगरेप किया फिर पिता के घर फेंग गए बदमाश.

श्रीगंगानगर में घर में महिला का गला रेता हुआ मिला.

चित्तौड़गढ़ में पड़ोसी ने 5 साल की मासूम बच्ची के साथ रेप किया.

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Related Articles