ओम बिड़ला ने ब्राह्मणों को बताया श्रेष्ठ, कांग्रेस ने की निंदा, कहा- मेरिट है आधार

संक्षेप:

  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने ब्राह्मणों को समाज में सबसे श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि यह स्थान उन्हें त्याग और तपस्या के चलते मिला है.
  • ओम बिड़ला के बयान पर सवाल खड़े होने लगे हैं.
  • कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष के बयान की निंदा की है और कहा कि जाति के आधार पर किसी को भी छोटा बड़ा नहीं माना जा सकता है.

नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने ब्राह्मणों को समाज में सबसे श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि यह स्थान उन्हें त्याग और तपस्या के चलते मिला है. ओम बिड़ला के बयान पर सवाल खड़े होने लगे हैं. कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष के बयान की निंदा की है और कहा कि जाति के आधार पर किसी को भी छोटा बड़ा नहीं माना जा सकता है. राजस्थान के कोटा में अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के कार्यक्रम को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि समाज में ब्राह्मणों का हमेशा से उच्च स्थान रहा है. यह स्थान उनकी त्याग और तपस्या का परिणाम है. यही वजह है कि ब्राह्मण समाज हमेशा से मार्गदर्शक की भूमिका में रहा है.

कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के बयान की भर्त्सना करते हुए कहा कि जाति के आधार पर किसी को छोटा-बड़ा नहीं घोषित कर सकते. जाति और जन्म के आधार पर नहीं बल्कि मेरिट के आधार पर कोई श्रेष्ठ होता है. लोकसभा स्पीकर का बयान गलत मानसिकता का नतीजा है. योग्यता से लोग प्रेरणास्त्रोत बनते हैं न की जाति से.

लोकसभा अध्यक्ष के बयान पर बसपा के राज्यसभा सदस्य वीर सिंह ने कहा कि जाति के आधार पर समाज में कोई सर्वश्रेष्ठ नहीं होता है बल्कि उसका कर्म उसे श्रेष्ठ बनाता है. ब्राह्मण को जन्म के आधार पर समाज का मार्गदर्शक नहीं बताया जाना चाहिए, क्योंकि ब्राह्मण वो होता है, जो शिक्षित और काबिल होता है. डॉ. भीमराव अंबेडकर बहुत पड़े लिखे थे,उन्होंने समाज और देश को मार्ग दिखाया इसीलिए वह श्रेष्ठ थे. ऐसे में जन्म से किसी को ब्राह्मण नहीं बताया जाना चाहिए.

ये भी पढ़े : 25 सौ रुपये के समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी एक दिसंबर से, सरहद पर होगी पंजीकरण और परिवहन की जांच


If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Related Articles