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बरगद दूल्हा... पीपल दुल्हन; राजस्थान में ढोल-नगाड़ों के साथ वृक्षों की अनोखी शादी, बराती बने ग्रामीण रस्मों में हुए शामिल
- न्यूज़
- Friday | 24th May, 2024
शादी समारोह सम्पन्न करवाने वाले पंडित हेमराज शर्मा ने बताया कि हिंदू रीति-रिवाजों में सभी धार्मिक कार्य पीपल के पेड़ में किए जा सकते हैं।
शादी करने के बाद ही यह वृक्ष पवित्र माना जाता है।
शादी के बीच पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाने मात्र से मनोकामनापूर्ण हो जाती है।
यह पूजा करने के लिए पवित्र माना जाता है। फलौदी में बछड़े-बछड़ी की शादी उधर फलौदी जिले नगर गांव में एक बछड़े और बछड़ी की शादी करवाई गई।
ग्रामीणों ने उत्साह से गीत-संगीत के बीच बछड़े और बछड़ी को सजाया।
इसके बाद दोनों के सात फेरे करवाए गए। गुरूवार को बुद्ध पूर्णिमा के दिन इस तरह केशादी समारोह राजस्थान में प्रतिवर्ष आयोजित होते हैं।
आयोजकों का कहना है कि इस तरह के शादी समारोह के आयोजन के पीछे मकसद गौमाता को राष्ट्रमाता और गौसंवर्धन के रूप में बढ़ावा देना है। ग्रामीणों का मानना है कि बछड़े और बछड़ी की शादी करने से गांव में सुख समृद्धि होती है।
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