राजस्थान के करौली में मंदिरों की शृंखला, पर्वतीय वनक्षेत्र और बाघ की दहाड़; आस्था की नगरी में होंगे पहाड़ व वन्यजीव के दर्शन

11 वीं सदी में हुआ था मंदिर का निर्माण काली सिंध नदी के किनारे, त्रिकुट पर्वत पर स्थित देश के नौ शक्तिपीठों में शामिल कैलादेवी चामुण्डा माता का मंदिर का निर्माण 11वीं सदी में हुआ और समय के साथ यह विकसित होता गया।

यहां काली सिंध नदी का पानी देखने में काला लगता है, लेकिन बोतल या गिलास में भरते ही यह स्वच्छ दिखता है।

इस मंदिर का प्रबंधन आज भी करौली का राजपरिवार देखता है। करौली शहर की पहचान है सदियों पुराना मदनमोहनजी का मंदिर कैलादेवी से करीब 20 किलोमीटर दूर चंबल नदी किनारे करनपुर गांव में बिजासन माता का मंदिर है, जिन्हें चामुण्डा माता की बहन माना जाता है, यहां पहुंचने के लिए पहाड़ी व जंगली क्षेत्र में बनी सड़कें यात्रा का आनंद बढ़ा देती हैं।

कैलादेवी से 22 किलोमीटर दूर करौली शहर जिला मुख्यालय है, जहां लगभग 300 मंदिर हैं, लेकिन लाल पत्थर से नक्काशीदार कला से बना सदियों पुराना मदनमोहनजी का मंदिर करौली शहर की पहचान है, जहां राधा-कृष्ण जी मंदिर के तीन गर्भगृह कतार में हैं, तीनों में भगवान कृष्ण व राधा अलग-अलग स्वरूपों में विराजे हैं। करौली चामुण्डा माता को चना, हलवा, पूड़ी का भोग लगता है तो मदनमोहनजी को दाल, कढ़ी, चावल, पकवानों के साथ देसी घी में बने बूंदी के लड्डुओं का भोग लगता है, मंदिर परिसर में ही श्रद्धालुओं के लिए यह लड्डू उपलब्ध रहते हैं। हर माह की अष्टमी को जुटते हैं लाखों श्रद्धालु करौली, कैलादेवी में हर रोज हजारों श्रद्धालु व पर्यटक पहुंचते हैं, जबकि हर माह की अष्टमी के तिथि पर कैलादेवी के दरबार में लाखों लोग आते हैं।

इस धार्मिक स्थल पर आस्था का ज्वार चैत्र व शारदीय नवरात्र में उमड़ता है, जब मंदिर के गर्भगृह द्वार से लेकर पहाड़ी के नीचे बस स्टैण्ड तक लाखों श्रद्धालुओं की कतार लगती है, तब पूरा करौली नवरात्र के उत्सव में नहाया होता है।

नवरात्र के नौ दिन दूर-दूर से यात्री पदयात्रा कर आते हैं। कई दार्शनिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थान हैं करौली में जंगल, पहाड़, नदी और वन्यजीव प्रेमियों के लिए कैलादेवी वन्यजीव अभयारण्य है, जो सवाई माधौपुर जिले तक लगभग 375 वर्ग किलोमीटर में फैला है।

1983 में बने इस अभयारण्य में बाघों (टाइगर) की अच्छी खासी मौजूदगी है, इसका एक छोर चंबल नदी किनारे से सटा है।

If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

डिसक्लेमर :ऊपर व्यक्त विचार इंडिपेंडेंट NEWS कंट्रीब्यूटर के अपने हैं,
अगर आप का इस से कोई भी मतभेद हो तो निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिखे।