शादियों में बर्तन धोते हैं माता-पिता, खुद फैक्ट्री में मजदूरी करता है छात्र; नीट परीक्षा क्रैक कर रचा इतिहास

एक वक्त था कि जब पढ़ाई में होनहार होने के बावजूद श्रवण कुमार ने 12वीं के आगे की पढ़ाई नहीं करने का फैसला किया था।

लेकिन अभाव में पले-बढ़े श्रवण कुमार की जिंदगी तब पलटी, जब 2022 के अंत में उनके गांव में बिजली आई और राज्य सरकार की एक योजना के तहत उनकी मां को इंटरनेट एक्सेस के साथ स्मार्टफोन मिला। ग्रामीण इलाकों में करना चाहते हैं सेवा श्रवण कुमार ने यहीं से नीट को अपनी जिंदी का ध्येय बना लिया।

बाड़मेर के सरकारी डॉक्टरों का एक ग्रुप गरीब बच्चों को नीट की मुफ्त कोचिंग कराता है।

इससे श्रवण कुमार भी लाभान्वित हुए।

उनका कहना है कि वह डॉक्टर बनकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में सेवा करना चाहते हैं।

श्रवण कुमार ने कहा कि वह अपने माता-पिता को घंटों बर्तन साफ करते नहीं देख पाते।

उन्होंने कहा कि कमाना शुरू करते ही वह सबसे पहले एक पक्का मकान बनवाएंगे और अपने माता-पिता को बर्तन धुलने का काम छोड़ने के लिए कहेंगे।

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