झांसी: रंगीन मछलियों से होगी बुंदेलों के रोजगार में बढ़ोत्तरी

संक्षेप:

  • रंगीन मछलियां देंगी बुंदेलों को रोजगार
  • सजावटी एवं रंगीन मछलियां रोजगार का नया जरिया
  • झांसी में नई हैचरी तैयार करने की योजना है

झांसी। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने की कवायद की जा रही है। हाल के वर्षों में घरों में एक्वेरियम रखने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। झांसी मंडल में रंगीन मछलियों का पूरा कारोबार करीब पांच करोड़ का है। सरकार ने इसे बढ़ाने की योजना तैयार की है। इसके जरिए न सिर्फ व्यवसाय बढ़ेगा बल्कि रोजगार में भी वृद्घि होगी। अभी रंगीन मछलियों का पूरा कारोबार बंगाल से होता है।

हुबली समेत आसपास के इलाकों से हर वर्ष यहां मछलियां मंगवाई जाती हैं लेकिन, मत्स्य विभाग के जरिए अब यहां पर हैचरी बनवाई जाएगी। एक हैचरी पर करीब 25 लाख का खर्च होगा। इस योजना से सजावटी एवं रंगीन मछलियां रोजगार का अब नया जरिया बनेंगी। इसके लिए झांसी में नई हैचरी तैयार करने की योजना है। इसके जरिए यहां न सिर्फ यहां रंगीन मछलियां का उत्पादन होगा बल्कि पालन केंद्र भी तैयार किए जाएंगे। इनके नए वित्तीय वर्ष से आरंभ होने की उम्मीद जताई जा रही।

नए वित्तीय वर्ष के लिए तैयार की गई कार्य योजना में इसका प्रस्ताव किया गया है। उप निदेशक ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि मत्स्य उत्पादन बढ़ाने को 5.43 करोड़ की कुल कार्य योजना बनाई गई है। इसके जरिए मत्स्य हैचरी, 16 निजी तालाब निर्माण, एक लघु आरएएसए, तीन जिंदा मछली विक्रय केंद्र, 13 मोटर साईकिल विद आईसबाक्स, छह थ्रीव्हीलर विद आईसबाक्स, तीन बायोफ्लोक निर्माण, एक लघु मत्स्य आहार मिल, पांच वृहद बायोफ्लोक टैंक, 50 टैंक क्षमता तैयार करने की योजना बनाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि इनके जरिए नए लोगों को रोजगार दिया जाएगा।

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सौ से लेकर पांच हज़ार तक की मछलियां –

बाजार में विभिन्न प्रजातियों की मछलियां उपलब्ध हैं, एक्वेरियम के बढ़ते चलन की वजह से रंगीन मछलियों की मांग लगातार बनी रहती है। इनकी कीमत सौ रुपये से लेकर 5000 रुपये प्रति जोड़े तक होती है। यह उनके आकार एवं प्रजति पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर शार्क, गोल्डेन फिश, रेडकैप, ओरांडा, ग्रीन ट्रेरर, एंजेल, शॉटटेल, मौली, व्हाइट मौली, फ्लावर हॉर्न जैसी प्रजाति की खासी मांग रहती है।

 

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