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IIT Kanpur के वैज्ञानिकों का कमाल, टोनर रिसाइक्लिंग से कार्ट्रिज सस्ता करके ई-वेस्ट का पहाड़ बनने से रोका- हर माह डेढ़ लाख टोनर हो रहा रिसाइकल
- न्यूज़
- Sunday | 26th May, 2024
एक हजार साल में भी विनाश संभव नहीं : वैज्ञानिक प्रिंटिंग तकनीक के विकास के साथ ही टोनर पाउडर का कचरा पूरी दुनिया के लिए समस्या बन रहा है।
कंप्यूटर के प्रिंटर कार्ट्रिज में प्लास्टिक, धातु (एल्यूमीनियम और अन्य धातुओं की छोटी मात्रा), रबर, कागज, फोम और टोनर पाउडर का प्रयोग किया जाता है।
यह पाउडर कार्बन और पालिमर से बनता है। विज्ञानियों के अनुसार इसका विनाश एक हजार साल में भी संभव नहीं है।
प्रिंटर कार्ट्रिज का प्रयोग करने वाले इसे कचरे में फेंक दे रहे हैं जहां कबाड़ का काम करने वाले एल्युमीनियम समेत अन्य धातुएं तो निकाल लेते हैं, लेकिन टोनर पाउडर को जमीन में डाल देते हैं। इसके स्थायी समाधान के लिए आर-क्यूब ने प्रिंटर कार्ट्रिज को वापस लेकर और टोनर पाउडर को दोबारा उपयोगी बनाने का काम शुरू किया है।
टोनर पाउडर को पुन: उपयोगी बनाने वाली यह एशिया की अकेली कंपनी है, लेकिन जागरूकता के अभाव में हर माह लाखों टोनर कार्ट्रिज कंपनी के पास तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
भूटान से 30 हजार कार्ट्रिज की हर महीने हो रही रीसाइकलिंग आर-क्यूब ने पांच साल पहले अपने रीसाइकल बिजनेस की शुरुआत की है।
मुंबई समेत देश के बड़े शहरों में कंपनी काम कर रही है।
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