National Endangered Species Day: राजकीय पक्षी पर संकट, तीन साल में तीन सौ सारस विलुप्त, यह आंकड़ा देख रह जाएंगे हैरान

इसे भी पढ़ें- जौनपुर की रैली में पीएम-सीएम की जोड़ी देख हंसी नहीं रोक पाएं PM मोदी, बोले- कितना सुंदर लग रहा ये मोदी और योगी लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम 1973, वन्यजीवों और संकटग्रस्त प्रजातियों की सुरक्षा पर केंद्रित है।

वन विभाग के अफसरों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल यूनियन फार कंजर्वेशन आफ नेचर (आइयूसीएन) के अनुसार पिछले दो दशकों में लुप्तप्राय प्रजातियों की संख्या पूरी दुनिया में दोगुणा से अधिक हो गई है। संस्था के आकड़ों के अनुसार दुनिया में वन्य जीव की 31,000 से अधिक प्रजातियों पर विलुप्त होने का खतरा है।

यह सभी वन्य जीव प्रजातियों का 27 प्रतिशत है।

इसी कड़ी में अब प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस पर खतरा मंडराने लगा है। इसे भी पढ़ें-गोरखपुर के युवक का मिला पाकिस्तानी कनेक्शन, एटीएस ने उठाया, चार घंटे पूछताछ के बाद साथ ले गई टीम हालांकि वन विभाग के अफसरों का कहना है कि गर्मी के मौसम में सारस दलदली जगह, तालाब या नदी किनारे चले जाते हैं, जिसके कारण उनकी संख्या कम हो जाती है।

जिले में वर्ष 2020 तक सारस की संख्या 426 थी लेकिन 2023 में हुई गणना में यह संख्या घटकर 123 पहुंच गई।

जून माह में वन विभाग ग्रीष्मकालीन गणना का कार्य शुरू करेगा। कानपुर मंडल के मुख्य वन संरक्षक केके सिंह ने कहा कि जिलास्तर पर केवल सारस की गणना का कार्य वर्ष में दो बार किया जाता है।

इस प्रजाति के साथ ही अन्य जीव, पशु और पक्षियों के संरक्षण को लेकर लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

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