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चीनी मिलों की राख से बनेंगी ईंट, प्लास्टर की नहीं होगी जरूरत; मजबूती ज्यादा और प्लास्टर की भी जरूरत नहीं
- न्यूज़
- Tuesday | 3rd June, 2025
पांच हजार टन गन्ना की पेराई करने वाली चीनी मिल से प्रति दिन 20 टन तक राख का उत्सर्जन होता है।
अभी तक इस राख का निस्तारण चीनी मिलों की ओर से गड्ढों के भराव में किया जाता रहा है लेकिन चीनी मिलों से निकली राख में विभिन्न रसायनिक पदार्थों की मौजूदगी से वह मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं माना जाती।इसी कारण केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की ओर से चीनी मिलों पर लगातार शिकंजा कसा जाता है।
उनसे राख के उचित निस्तारण के बारे में सवाल-जवाब किए जाते हैं। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि चीनी मिलों के बायलरों से निकलने वाली राख से वायु प्रदूषण होता है और इसका निपटान मुश्किल है।
लंबे समय से इसके सुरक्षित निपटान पर विचार किया जाता रहा है।चीनी मिल में गन्ने की खोई जलने से निकली राख से तैयार ईंट।
संस्थान इस समस्या के समाधान पर काम शुरू किया गया तो बिजलीघरों से निकलने वाली राख की तरह इसके उपयोग का विचार आया।
चीनी मिलों से निकलने वाली राख और बिजलीघरों की राख के गुण अलग हैं।इससे ईंट बनाने में बड़ी समस्याएं आईं, लेकिन आखिरकार सफलता मिल गई।
अब डालमिया समूह की दो चीनी मिलों में बायलर की राख से ईंट का निर्माण किया जा रहा है। ऐसे बनती है ईंटप्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि ईंट बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल बायलर की राख, पत्थर की रेत और सीमेंट है।
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