बसपा सुप्रीमो ने योगी सरकार पर उठाए सवाल, बोलीं- क्या प्राइवेट मदरसों को सरकारी बनाना चाहती है सरकार?

संक्षेप:

  • बसपा सुप्रीमो ने योगी सरकार पर किया हमला।
  • प्राइवेट मदरसों के हो रहे सर्वे पर उठाए सवाल।
  • सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बताया बदतर।

लखनऊ. बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को ट्वीट कर योगी सरकार द्वारा करवाए गए मदरसा सर्वे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब गैर मान्यता प्राप्त मदरसे सरकार पर बोझ नहीं हैं तो सरकार इनमें क्यों दखल दे रही है। इन मदरसों में गरीब बच्चों को तालीम दी जाती है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि यूपी सरकार द्वारा विशेष टीम गठित करके लोगों के चन्दों पर आश्रित प्राइवेट मदरसों के बहुचर्चित सर्वे का काम पूरा हो गया है जिसके अनुसार 7,500 से अधिक `गैर-मान्यता प्राप्त` मदरसे गरीब बच्चों को तालीम देने में लगे हैं। ये गैरसरकारी मदरसे सरकार पर बोझ नहीं बनना चाहते तो फिर इनमें दखल क्यों?

क्या यूपी सरकार प्राइवेट मदरसों को सरकारी बनाएगी - मायावती

जबकि सरकारी मदरसा बोर्ड के मदरसों के टीचर व स्टाफ के वेतन आदि के लिए बजट प्रावधान हेतु खास तौर से सर्वे कराया जाता है तो क्या यूपी सरकार इन प्राइवेट मदरसों को अनुदान सूची में शामिल करके उन्हें सरकारी मदरसा बनाएगी? बसपा सरकार ने 100 मदरसों को यूपी बोर्ड में शामिल किया था।

ये भी पढ़े : Lok Sabha Election 2024: सोमनाथ भारती बोले हमारे जीत के लिए अदृश्य शक्तियां भी काम कर रही है


सरकारी स्कूलों की बदतर शिक्षा व्यवस्था किसी से छिपा नहीं

पहले कांग्रेस सरकार ने `मदरसा आधुनिकीकरण` के नाम पर वहां के छात्रों को उनकी पसंद की उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने के बजाय उन्हें ड्राइविंग, मैकेनिक, कारपेन्टर आदि की ट्रेनिंग के जरिए छात्रों की तालीम व उन मदरसों का भी अपमान किया और अब आगे देखना है कि ये भाजपा सरकार में उनका क्या करती है। वैसे यूपी व देश के अन्य सभी राज्यों में भी सरकारी स्कूलों के साथ-साथ पूरी शिक्षा व्यवस्था के हालात जो लगातार बदतर होते चले जा रहे हैं वह किसी से भी छिपा नहीं है फिर भी सरकारें लापरवाह व उदासीन क्या इसलिए हैं कि वहां ज्यादातर गरीब व कमजोर वर्गों के बच्चे ही पढ़ते हैं?

If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Read more Lucknow की अन्य ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें और अन्य राज्यों या अपने शहरों की सभी ख़बरें हिन्दी में पढ़ने के लिए NYOOOZ Hindi को सब्सक्राइब करें।