Rajnath Singh: …तो इसलिए बन जाते हैं मंत्री, अटल के खासमखास होने के अलावा इन फैसलों के लिए भी जाने जाते हैं राजनाथ

1974 में राजनीति में प्रवेश 2014 में उन्होंने लखनऊ लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर अटल बिहारी वाजपेयी की सीट पर भाजपा का दबदबा बरकरार रखा था।

इसके बाद लखनऊ से उनका जुड़ाव और भी बढ़ गया था।

सिर्फ उनका ही नहीं, उनके दोनों बेटों का भी लखनऊ से खासा लगाव है।  अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में राजनीति का ककहरा सीखने के बाद उन्होंने 1974 में राजनीति में प्रवेश किया था और मिर्जापुर से 1977 में विधायक चुने गए।  मार्च 1997 में उन्हें भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था और उन्होंने राजनीतिक संकट के दौरान दो बार भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।  अक्टूबर 2000 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, इससे पहले नवंबर 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री बने।

2003 में राजनाथ सिंह केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में कृषि मंत्री बने। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पार्टी की विचारधारा को देश को कोने-कोने में जन-जन तक पहुंचाने का काम किया था।

बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों और आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरों के मुद्दे को उठाते हुए कई राज्यों में भारत सुरक्षा यात्रा भी शुरू की थी।

वह 2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री बने और 2019 में देश के रक्षा मंत्री बनाए गए थे।  मां के निधन पर भी नहीं हो सके थे रिहा 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तरफ से लगाए आपातकाल का विरोध करने पर राजनाथ सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया था और दो साल तक हिरासत में रखा गया।

यहां तक की मां के निधन पर भी नहीं रिहा किया गया था।  महिला आरक्षण का मुद्दा उठाया  2007 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे राजनाथ सिंह ने पार्टी में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव रखा था।

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