श्रीविष्णु सर्व अद्भुत शांति महायज्ञ, सीएम योगी बोले- सप्तपुरियों में से एक पुरी के रूप में रामनगरी ऊंचाईयों को छूती दिख रही है

संक्षेप:

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा।
  • संपूर्ण मानवता के आगे उन्होंने अपने मानवीय चरित्र से मर्यादा प्रस्तुत किया।
  • आज हर एक व्यक्ति अयोध्या की परंपरा से जुड़ना चाहता है।

लखनऊ- अयोध्या सूर्यवंश की राजधानी है, भगवान राम की जन्मभूमि है। भगवान श्रीराम ने सम-विषम परिस्थितियों में मर्यादा का पालन किया। संपूर्ण मानवता के आगे उन्होंने अपने मानवीय चरित्र से मर्यादा प्रस्तुत किया। आज हर एक व्यक्ति अयोध्या की परंपरा से जुड़ना चाहता है।विश्व मानवता भी आज अयोध्या के साथ जुड़ने पर गौरव की अनुभूति करता है। दुनिया आज अयोध्या के साथ जुड़ रही है, आत्मीय संवाद बना रही है। सप्तपुरियों में से एक पुरी के रूप में रामनगरी अयोध्या ऊंचाईयों को छूती दिख रही है। उक्त बातें उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुई कहीं।

सीएम योगी ने कहा कि दीपोत्सव के जरिए विदेशों तक रामलीला संस्कृति का प्रसार हुआ। यहां तक कि मुस्लिम देश इंडोनेशिया में राम के प्रति श्रद्धा है। 2017 में जब इंडोनेशिया के कलाकारों ने अयोध्या में रामलीला की तो उन्हें मुख्यमंत्री आवास पर बुलाकर मैंने सम्मानित किया। कलाकारों ने कहा कि हम सिर्फ कलाकार ही नहीं है, बल्कि राम के साथ हमारा आत्मीय संबंध है। राम हमारे लिए सिर्फ नाट्य मंचन नहीं है, आस्था के प्रतीक हैं, पूर्वज हैं। हमारे पूर्वजों ने भले ही उपासना बदल ली हो लेकिन उपासना बदलने से पूर्वज नहीं बदलते। विश्व मानवता भी आज अयोध्या के साथ जुड़ने पर गौरव की अनुभूति करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामो विग्रहवान् धर्म:..के जरिए एक लाइन में ही सब कुछ कह दिया। राम धर्म हैं, राम और धर्म एक दूसरे के पूरक हैं। हम राम की मर्यादा या धर्म दोनों में किसी एक को अपना लें वही धर्म है, वहीं राम हैं। इससे पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 12:39 बजे महर्षि आश्रम पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने परिसर में बने यज्ञमंडप में पहुंचकर 101 पुरोहितों के द्वारा कराए जा रहे मंत्रोच्चार के बीच हवन एवं आरती कर यज्ञ की पूर्णाहुति की।

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कार्यक्रम का संचालन महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी के निदेशक दिनेश पाठक ने किया। महर्षि विद्यापीठ के मुख्य ट्रस्टी अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को ट्रस्ट की अवधारणाओं से अवगत कराते हुए महर्षि महेश योगी के योगदानों को रेखांकित किया। बताया कि महर्षि रामायण विश्वविद्यालय के स्थापना के लिए सरकार से अनुमति मिल गई है, शीघ्र ही काम शुरू होगा। महर्षि महेश योगी पर आधारित तीन मिनट की लघु फिल्म का भी प्रस्तुतीकरण किया गया। मुख्य ट्रस्टी ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र व गौ माता का स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी, नगर विधायक वेदप्रकाश गुप्ता, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, विधायक रामचंद्र यादव, विधायक शोभा सिंह चौहान, जिलाध्यक्ष संजीव सिंह, महानगर अध्यक्ष अभिषेक मिश्र, समाजसेवी विकास श्रीवास्तव, श्रद्धानंद श्रीवास्तव सहित अन्य मौजूद रहे।

महर्षि ने वेद, योग की परंपरा को मजबूती के साथ दुनिया के सामने रखा
मुख्यमंत्री ने महर्षि महेश योगी के योगदान को अद्भुत बताया। कहा कि 1998 में संवाद का अवसर प्राप्त हुआ था। 1950-60 के दशक में महर्षि ने भारत और भारतीयता को विश्व पटल पर प्रस्तुत करने के लिए अद्भुत कार्य किया। जब दुनिया ने हमारे बारे में गलत धारण बना ली थी। तब उन्होंने भारत के वेदों की परंपरा को हर एक व्यक्ति से जोड़ा । वेदों के बारे में दुष्प्रचार हुआ है। उसके बावजूद दुनिया के मंचों पर बेधड़क वेदों की बातें, रामायण के प्रसंग, महाभारत के उद्धरणों को प्रस्ततु कर वेद, योग की परंपरा को मजबूती के साथ दुनिया के सामने रखा। भावातीत ध्यान से विश्व का ध्यान आकृष्ट कराया। जिस काल खंड में भारत और भारतीयता से मुंह मोड़ने का प्रयास हो रहा था उस कालखंड के लिए यह अद्भुत था।

जिनको स्वंय पर संदेह वही मंदिर निर्माण में संदेह व्यक्त करेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या ने पांच सौ वर्षों तक संघर्ष झेला। गौरी से लेकर मसूद गाजी तक ने मंदिर को अपवित्र करने का काम किया। समय-समय पर हमले होते रहे। हमारी भावना को कुंद करने का प्रयास किया, लेकिन अयोध्या चुपचाप नहीं बैठी रही। राम ने न अन्याय किया और न अन्याय सहा। अर्धम नहीं करेंगे,अधर्म नहीं सहेंगे यही अयोध्या ने किया। अत्याचार, अनाचार का जवाब देने के लिए अयोध्या हमेशा खड़ी रहेगी। कहा कि 5 अगस्त 2020 को पीएम नरेंद्र मोदी ने राममंदिर निर्माण का शुभारंभ भी कर दिया है। अब संदेह नहीं है, जिनको स्वंय पर संदेह होगा, वहीं राममंदिर निर्माण में संदेह व्यक्त करेंगे।

हर काल खंड में धर्म का परिमार्जन जरूरी
मुख्यमंत्री ने महाभारत ग्रंथ का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय ऐसा चला जब हमारी संस्कृति पर आघात किया गया। साजिश चली कि महाभारत जैसे ग्रंथघर में नहीं रखे जाएं। उसी महाभारत ग्रंथ का एक हिस्सा श्रीमद्भागवत गीता भी है, जिसे देश ने राष्ट्रीय ग्रंथ माना है न्याय की अदालत में उसकी कसम खाई जाती है। इन तथ्यों से अनभिज्ञ करने के लिए दुष्प्रचार चलाया गया। कहा कि समय-समय पर धर्म का परिमार्जन जरूरी है। हर काल खंड में परिमार्जन होना चाहिए। समाज को कमजोर करने वाले पाखंडियों, विधर्मियों, रूढ़िवादी तत्वों को दूर करना होगा। जोड़ने के बजाए जब-जब तोड़ने वाली कड़ियां मजबूत हुईं तब-तब हमले हुए, देश पराधीन हुआ। जब कड़िया जुड़ी हैं देश ने एकजुटता का परिचय दिया है तब दुनिया की कोई ताकत भारत के सामने नहीं टिक पाई है।

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