UP Lok Sabha Result 2024: करारी हार के कारणों की समीक्षा करने में जुटी मायावती, इन पदाधिकारियों पर होगी कार्रवाई

शून्य पर सिमटी बसपा का वोट भी घटा दरअसल, 18वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में बसपा न केवल एक दशक बाद फिर शून्य पर सिमट गई है बल्कि उसका वोट बैंक भी 10 प्रतिशत से अधिक खिसक गया है।

देशभर में भी बसपा का वोट सवा दो करोड़ से घटकर 1.32 करोड़ ही रह गया है।

प्रदेश में अकेले लड़ी बसपा को इस बार मात्र 9.39 प्रतिशत वोट मिले हैं।  दो वर्ष पहले विधानसभा चुनाव में एक सीट जीतने पर भी पार्टी को 12.83 प्रतिशत वोट मिले थे।

सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से लखनऊ आ चुकी मायावती ने एक भी सीट न मिलने से लेकर 1991 के बाद इतना कम वोट मिलने के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी।  सूत्र बताते हैं कि हार के पीछे बड़े कारणों में प्रत्याशियों का चयन ठीक न होना, ज्यादातर कोऑर्डिनेटर से लेकर जिला अध्यक्षों की अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय न होने और पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार न करने को माना गया है। कम रैलियां के कारणों की भी पड़ताल मायावती की रैलियों में भीड़ न जुटने व दूसरे प्रदेशों में कम रैलियां के कारणों की भी पड़ताल की जा रही है।

सूत्र बताते हैं कि कई ऐसी सीटें हैं जहां बसपा को एक लाख से भी कम वोट मिले हैं।

कुछ सीटों के बारे में माना जा रहा है कि कोऑर्डिनेटर व जिलाध्यक्षों ने प्रत्याशियों के संबंध में सही फीडबैक नहीं दिया।  ऐसे में दूसरी पार्टियों के उम्मीदवार बसपा से अपने ही किसी के लिए टिकट लेकर उसे डमी प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा।

वैसे तो ज्यादातर सीटों पर बसपा तीसरे स्थान पर रही है लेकिन नगीना सहित कुछ सीटों पर पार्टी चौथे स्थान पर पहुंच गई है।  नगीना सीट पर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के चंद्रशेखर आजाद के सांसद बनने और बसपा को सिर्फ 13, 212 वोट मिलने के कारणों को भी देखा जा रहा है।  पार्टी सूत्रों का कहना है कि हार के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार पदाधिकारियों को पद से हटाया जाएगा।

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