Wipro के चेयरमैन अजीम प्रेमजी के खिलाफ मुकदमा खारिज, श्रम कानून के कथित उल्लंघन के मामले में मिली राहत

प्रेमजी के अधि‍वक्‍ता ने क्‍या कहा? प्रेमजी के अधिवक्ता करुणानिधि यादव का तर्क था कि विप्रो ने एक सर्विस प्रोवाइडर कंपनी मेसर्स जी फॉर जी सिक्योर साल्यूसन्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से मैन पावर सप्लाई करने का समझौता किया था।

समझौते में साफ था कि काम करने वाले न तो विप्रो के एजेंट होंगे और न ही उसके कर्मचारी ही कहलाएंगे।

यह भी तय था कि उनका भुगतान भी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी ही देगी।

यह भी कहा गया कि कि प्रेमजी का लखनऊ के विप्रो के लोकल ऑफिस से प्रतिदिन के कामकाज से कोई लेना देना नहीं है। यह भी पढ़ें: एपीओ भर्ती 2022 मामला: खाली 30 पदों को चयन सूची की मेरिट से भरने पर सरकार को निर्णय लेने का निर्देश यह भी पढ़ें: Lok Sabha Election 2024: अंतिम चरण की 13 सीटों पर आज शाम थमेगा चुनाव प्रचार, मोदी-योगी के गढ़ पर सभी की निगाहें ।

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