पश्चिम से पूर्वांचल तक हर जगह दरका NDA का किला, मोदी-योगी के गढ़ में भाजपा को लगा सबसे बड़ा झटका

मतदाताओं का मिजाज भांपने में चूकी भाजपा उत्तर प्रदेश में मोदी-योगी के नेतृत्व में भाजपा ने चरणवार मुद्दे बदले और रणनीति भी।

सनातन धर्म, मंगलसूत्र, राम मंदिर के साथ ही ध्रुवीकरण की भी कोशिशें हुईं लेकिन मतदाताओं का वास्तविक मिजाज भांपने में पार्टी कामयाब नहीं हुई। वहीं, सपा का पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फार्मूला, संविधान बदलने व आरक्षण खत्म करने का दांव अपेक्षाकृत असरदार दिखा।

बेरोजगारी, अग्निवीर और पेपर लीक जैसे संवेदनशील विषयों को उठाकर सपा-कांग्रेस ने युवाओं को भी झकझोरा, जिसका नतीजा 2019 के मुकाबले हर चरण में भाजपा की सीटों की संख्या में गिरावट के रूप में सामने आया। 64 सीटों से सिमटकर 36 पर आई भाजपा पिछले चुनाव में अपने सहयोगी अपना दल (एस) के साथ 64 सीटों पर जीत दर्ज कराने वाली भाजपा महज 36 सीटों पर सिमट कर रह गई।

वोट प्रतिशत में भी जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई और यह पिछले चुनाव के मुकाबले आठ प्रतिशत तक गिर गया है। बता दें कि बीते लोकसभा चुनाव में पश्चिम उत्तर प्रदेश की पहले व दूसरे चरण की 16 सीटों में से भाजपा ने 10 पर जीत हासिल की थी।

उपचुनाव में रामपुर सीट भी भाजपा की झोली में गई थी, इस लिहाज से भाजपा 11 सीटों पर काबिज थी।

इस बार इन 16 सीटों में से 10 सीटें भाजपा और उसकी सहयोगी रालोद को हासिल हुई हैं। वहीं, तीसरे चरण में की 10 सीटों में पिछले चुनाव में भाजपा को आठ और सपा को दो सीटों पर संतोष करना पड़ा था।

इस बार सपा की सीटें बढ़कर छह हो गई हैं जबकि भाजपा की घटकर चार।

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