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पेपर लीक के मामले में कटघरे में थी योगी सरकार, अध्यादेश के जरिए दिया कड़ा संदेश; इस कारण नहीं कस पा रहा था शिकंजा
- न्यूज़
- Tuesday | 25th June, 2024
अलग-अलग परीक्षाओं में सक्रिय गिरोह के सक्रिय सदस्यों व साल्वर को एसटीएफ ने पकड़ा भी पर लचर कानून होने के चलते उन पर पूरी तरह से शिकंजा नहीं कसा जा सका।
साल्वर गिरोह के कई सदस्य तो एक के बाद एक दूसरी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने में शामिल रहे।
सिपाही भर्ती के लिए 18 व 19 फरवरी को हुई लिखित परीक्षा हुई थी, जिसका पेपर लीक हो गया था ऐसे ही 11 फरवरी को हुई आरओ/एआरओ परीक्षा में भी गड़बड़ी सामने आई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पेपर लीक के दोनों ही मामलों को बेहद गंभीरता से लिया था।
उप्र पुलिस भर्ती व प्रोन्नति बोर्ड की अध्यक्ष रेणुका मिश्रा को उनके पद से हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया गया था।
मुख्यमंत्री ने सिपाही भर्ती व आरओ/एआरओ की परीक्षा निरस्त कर छह माह के भीतर दोबारा परीक्षा कराए जाने का निर्देश दिया था।
दोनों प्रकरणों की जांच एसटीएफ को सौंपे जाने के साथ ही पेपर लीक कराने वाले गिरोह पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए कानून को और सख्त किए जाने कसरत भी शुरू हुई थी। वर्षां पुराने अधिनियम में थी अधिकतम दो वर्ष की सजा नए कानून पेपर लीक कराने व साल्वर गिरोह के सदस्यों की कमर तोड़ने वाला होगा।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार अब तक पेपर लीक व नकल के मामलों में उप्र सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) 1988 के तहत कार्रवाई करती थी।
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