मायावती को अब भतीजे आकाश से ही `चमत्‍कार` की उम्मीद, फ‍िर ज‍िम्‍मेदारी सौंपने के पीछे क्‍या है रणनीत‍ि?

2007 में पहली बार राज्‍य में बनाई थी बहुमत की सरकार  वर्ष 2006 में कांशीराम के न रहने बाद वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में जिस बसपा ने 30.43 प्रतिशत वोट और 206 विधायकों के साथ पहली बार राज्य में बहुमत की सरकार बनाई थी उसका इस समय न लोकसभा और न ही राज्यसभा में कोई सदस्य है।

विधानसभा में सिर्फ एक सदस्य जबकि विधान परिषद में भी कोई सदस्य नहीं है।

पार्टी के तेजी से खिसकते जनाधार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 18वीं लोकसभा के हालिया चुनाव में पार्टी को सिर्फ 9.39 प्रतिशत वोट हासिल हुए। पार्टी के लगातार खराब होते प्रदर्शन के कारण तमाम हैं लेकिन एक बात साफ है कि खासतौर से वंचित समाज में भी अब बहन जी का पहले जैसा जादू नहीं रहा।

इसका बड़ा कारण यह माना जाता है कि 68 वर्षीय मायावती अब इंटरनेट मीडिया पर ही ज्यादा सक्रिय दिखाई देती है।

न पदाधिकारियों के बीच और न ही फील्ड में उनकी पहले जैसी सक्रियता रहती है जबकि राजनीति के बदलते दौर में दूसरी पार्टियों के छोटे-बड़े नेता लगातार फील्ड में दिखाई देते हैं। आकाश को सौंपा था यूपी-उत्तराखंड का दाय‍ित्‍व   ऐसे में मायावती ने पिछले वर्ष 10 दिसंबर को अपने 28 वर्षीय भतीजे आकाश आनंद को उत्तराधिकारी घोषित कर वचिंत समाज के युवाओं में खासतौर से पैठ बढ़ाकर पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश की थी।

तब मायावती ने आकाश को उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड को छोड़ देशभर में नीला परचम लहराने का दायित्व सौंपा था।

हालांकि, चुनाव के दौरान आकाश ने उत्तर प्रदेश में भी चुनावी रैलियां की।

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